मुंगेर: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बुधवार को मुंगेर में मीडिया से बातचीत के दौरान बिहार की सियासत में आए भूचाल पर अपनी चुप्पी तोड़ी। नीतीश कुमार के इस्तीफे और अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर पीके ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब बिहार का मुख्यमंत्री वह व्यक्ति बनेगा जिसकी 2025 के विधानसभा चुनाव की जीत में सबसे बड़ी भूमिका रही है।
नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए प्रशांत किशोर ने उनकी वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के पास 202 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन हो, वह कभी अपनी इच्छा से सत्ता नहीं छोड़ता। पीके ने याद दिलाया कि वह पहले से ही कह रहे थे कि नीतीश कुमार की शारीरिक और मानसिक स्थिति अब ऐसी नहीं रह गई है कि वे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब उन्होंने यह बात पहले कही थी, तब मीडिया और समाज के कई वर्गों ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन आज उनकी भविष्यवाणी सच साबित हो रही है।
पीके ने आगे कहा कि परिणाम चाहे जो भी रहे हों, लेकिन नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री के पद से हट रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वे स्वेच्छा से हट रहे हैं या किसी बड़े राजनीतिक दबाव में, लेकिन यह तय है कि अब बिहार में नीतीश युग का अंत हो रहा है।
मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया और चुनावी जीत पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को भी घेरे में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नाम पर 10 हजार का 'प्रपंच' नहीं रचा गया होता और 30 हजार करोड़ रुपये नहीं बांटे जाते, तो यह चुनावी सफलता मिलना नामुमकिन था। उनके अनुसार, जिस केंद्र सरकार और जिन रणनीतिकारों ने यह जनादेश हासिल करने में मदद की है, अब वही लोग तय करेंगे कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में होगी।
प्रशांत किशोर ने एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार के इतिहास में यह पहली बार होगा जब सत्ता की चाबी उन लोगों के पास होगी जिनकी प्राथमिकता बिहार के बजाय गुजरात होगी। उन्होंने दावा किया कि अब बिहार का शासन गुजरात के हितों को ध्यान में रखकर चलाया जाएगा। पीके के इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आने वाले समय में बिहार की पहचान और इसके संसाधन किसी बाहरी एजेंडे के तहत नियंत्रित होंगे।










