नई दिल्ली: यह चिकित्सा विज्ञान की एक अद्भुत विजय और दिल्ली के डॉक्टरों के कौशल का उत्कृष्ट प्रमाण है। सर गंगाराम अस्पताल के विशेषज्ञों ने अपनी असाधारण विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक के सटीक तालमेल से एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने न केवल एक मरीज की जान बचाई, बल्कि उसे एक अत्यंत जटिल और जोखिम भरी ओपन सर्जरी के दर्द से भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
आमतौर पर जब कोई नुकीली या सख्त चीज आहार नली में गहराई तक फंस जाती है, तो डॉक्टरों के पास सर्जरी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन संस्थान के लिवर और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में जिस सूझबूझ का परिचय दिया, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। मरीज जब असहनीय दर्द और सांस लेने में तकलीफ के साथ अस्पताल पहुंचा, तो उसके गले के संवेदनशील हिस्से में नकली दांतों का सेट (डेंचर) मजबूती से फंसा हुआ था। स्थिति की गंभीरता और डेंचर में लगे नुकीले धातु के क्लिप को देखते हुए पारंपरिक तरीके से उसे निकालना जानलेवा हो सकता था।
डॉक्टरों की इस टीम ने इस बाधा को एक अवसर में बदलते हुए अपनी तकनीकी निपुणता का प्रदर्शन किया। उन्होंने आधुनिक लेजर तकनीक का उपयोग करते हुए आहार नली के भीतर ही उस डेंचर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की सुरक्षा का इतना ख्याल रखा गया कि एक विशेष 'प्रोटेक्टिव ओवरट्यूब' का उपयोग किया गया, ताकि डेंचर के नुकीले हिस्से गले के कोमल ऊतकों को खरोंच तक न पहुंचा सकें।
बिना किसी चीर-फाड़ के इतने नाजुक हिस्से से विदेशी वस्तु को सफलतापूर्वक बाहर निकालना मेडिकल जगत की एक बड़ी उपलब्धि है। डॉ. श्रीहरि अनिखिंदी और उनकी पूरी टीम का यह प्रयास यह दर्शाता है कि जब मानवीय कौशल और एडवांस तकनीक का साथ मिलता है, तो जटिल से जटिल चिकित्सकीय चुनौतियों को भी बिना किसी बड़े जोखिम के हल किया जा सकता है। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किया गया यह सफल सफल इलाज उन तमाम मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो बड़ी सर्जरी के नाम से ही भयभीत हो जाते हैं।











