(रमण कुमार, संवाददाता, मधेपुरा)
मधेपुरा - मधेपुरा में बीमारी का इलाज शुरू होने से पहले ही मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है। वजह है जिलेभर में तेजी से फैलता अवैध पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटरों का नेटवर्क। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पूरे मधेपुरा जिले में सिर्फ 18 पैथोलॉजी लैब रजिस्टर्ड हैं, लेकिन जमीनी रूप से सैकड़ों जांचघर खुलेआम चल रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर इन लैब को किसका संरक्षण हासिल है ?
दरअसल मधेपुरा शहर हो, प्रखंड मुख्यालय या फिर गांव का छोटा बाजार हर जगह अब पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर की भरमार दिख रही है। निजी क्लीनिकों के आसपास धड़ल्ले से खुल रहे इन जांचघरों में हर दिन सैकड़ों मरीजों के खून, यूरिन और दूसरे सैंपल लिए जा रहे हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पूरे जिले में सिर्फ 18 पैथोलॉजी लैब ही रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाकी सैकड़ों से अधिक लैब आखिर किस नियम और अनुमति के तहत चल रहे हैं ? कई जगहों पर योग्य पैथोलॉजिस्ट तक मौजूद नहीं हैं, लेकिन मरीजों से मोटी रकम जरूर वसूली जा रही है। सबसे हैरान करने वाली बात ये भी सामने आई है कि मधेपुरा जिले में कुछ लैब ऐसे भी हैं, जो कथित तौर पर मृत डॉक्टर के नाम पर संचालित हैं। ऐसे में अगर रिपोर्ट गलत हुई तो इलाज भी गलत हो सकता है और इसकी कीमत मरीज को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
मामला सिर्फ गलत जांच तक नहीं है। कई लैब पर बायो मेडिकल वेस्ट नियमों की अनदेखी के भी आरोप हैं। इस्तेमाल किए गए सिरिंज, ब्लड सैंपल और मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
वहीं मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार इस मामले में कहते हैं कि जिले में जो पैथोलॉजी अवैध रूप से चल रहे हैं, उसकी लिस्ट बनायी जा रही है। जल्द ही जांच कर कार्रवाई की जाएगी।










