नई दिल्ली:
संसद में हाल ही में ट्रेड डील पर हुई बहस के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस और यूपीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि साल 2013 में यूपीए सरकार ने एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील के जरिए भारतीय किसानों के हितों से समझौता किया था। वित्त मंत्री ने विशेष रूप से विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट (Trade Facilitation Agreement – TFA) का हवाला दिया।
इन आरोपों के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक के मन में कई सवाल उठने लगे—
क्या वाकई यह समझौता भारतीय किसानों के लिए नुकसानदेह था?
क्या यूपीए सरकार ने किसानों के हितों की अनदेखी की?
और मोदी सरकार ने इसमें ऐसा क्या बदला जिससे किसानों को राहत मिली?
इस रिपोर्ट में हम टीएफए की पूरी पृष्ठभूमि, इसके प्रावधान, संभावित नुकसान, मोदी सरकार के हस्तक्षेप और भारत को हुए फायदे को विस्तार से समझेंगे।
ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट (TFA) क्या है?
ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत किया गया एक बहुपक्षीय व्यापार समझौता है।
यह समझौता दिसंबर 2013 में इंडोनेशिया के बाली में आयोजित WTO की मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ था।
क्यों था यह समझौता ऐतिहासिक?
- साल 1995 में WTO के गठन के बाद यह पहला वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार समझौता था
- इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार को सरल, पारदर्शी और सस्ता बनाना था
- सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान करना, कागजी कार्रवाई कम करना और भ्रष्टाचार घटाना इसका मुख्य लक्ष्य था
WTO का दावा क्या था?
- वैश्विक व्यापार लागत में करीब 15% की कमी
- दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर तक अतिरिक्त व्यापार
- लाखों नई नौकरियों के सृजन की संभावना
भारत के लिए TFA से क्या फायदे गिनाए गए थे?
समझौते के समय कहा गया था कि भारत जैसे विकासशील देशों को इससे विशेष लाभ मिलेगा।
- निर्यात प्रक्रियाएं आसान होंगी
- कस्टम क्लियरेंस तेज और सस्ता होगा
- भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे
- MSME सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी
इसी वजह से शुरू में भारत ने इस समझौते का खुलकर विरोध नहीं किया।
विवाद की जड़: खाद्य सुरक्षा और किसान सब्सिडी
हालांकि फायदे गिनाए जा रहे थे, लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा का था।
समस्या कहाँ थी?
WTO के मौजूदा नियमों के तहत:
- सरकार किसानों को सीमित सब्सिडी ही दे सकती है
- MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सरकारी खरीद को “मार्केट डिस्टॉर्टिंग सब्सिडी” माना जा सकता है
- PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के लिए बड़े पैमाने पर अनाज खरीद WTO नियमों से टकरा सकती थी
भारत की चिंता
भारत में:
- करोड़ों छोटे और सीमांत किसान हैं
- MSP किसानों की आय की रीढ़ है
- PDS देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है
अगर TFA बिना सुरक्षा उपायों के लागू हो जाता, तो:
- MSP पर अनाज खरीद पर सवाल खड़े हो सकते थे
- गरीबों को मिलने वाला सस्ता राशन प्रभावित होता
- सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति कानूनी विवादों में फंस सकती थी
‘पीस क्लॉज’ क्या था और क्यों था अपर्याप्त?
बाली सम्मेलन में भारत के दबाव के बाद एक अस्थायी समाधान निकाला गया, जिसे Peace Clause कहा गया।
Peace Clause का मतलब
- जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता
- तब तक भारत जैसे देशों पर WTO नियमों का उल्लंघन करने का मुकदमा नहीं चलेगा
समस्या क्या थी?
- यह केवल 4 साल के लिए था
- इसके बाद भारत की MSP और PDS योजनाएं फिर खतरे में आ सकती थीं
- इसे स्थायी सुरक्षा नहीं माना गया
यूपीए सरकार ने इसी अस्थायी पीस क्लॉज के साथ TFA पर आगे बढ़ने की सहमति दे दी थी।
मोदी सरकार के आने के बाद क्या बदला?
मई 2014 में एनडीए सरकार सत्ता में आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
उस समय तक:
- TFA पर सहमति बन चुकी थी
- जुलाई 2014 तक इसके प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जाना था
मोदी सरकार का बड़ा फैसला
मोदी सरकार ने साफ कर दिया कि:
जब तक खाद्य सुरक्षा और PDS पर स्थायी समाधान नहीं मिलेगा, भारत TFA को लागू नहीं करेगा।
इसके बाद:
- भारत ने WTO को TFA प्रोटोकॉल को अस्थायी रूप से रोकने की सूचना दी
- वैश्विक दबाव के बावजूद सरकार अपने रुख पर अड़ी रही
यह स्टैंड यूपीए सरकार से बिल्कुल अलग था।
WTO में भारत की जीत
भारत के कड़े रुख के बाद:
- WTO को खाद्य सुरक्षा पर भारत की चिंताओं को स्वीकार करना पड़ा
- बातचीत का नया दौर शुरू हुआ
अप्रैल 2016 में क्या हुआ?
- भारत को खाद्य सुरक्षा पर स्थायी समाधान का आश्वासन मिला
- MSP पर अनाज खरीद और PDS को WTO नियमों से बाहर रखने की सहमति बनी
- इसके बाद ही भारत ने TFA को अंतिम रूप से स्वीकार किया
TFA लागू होने के बाद भारत को क्या फायदा हुआ?
1. निर्यातकों को सीधा लाभ
- कस्टम क्लियरेंस तेज हुआ
- दस्तावेजी प्रक्रिया डिजिटल हुई
- MSME निर्यातकों की लागत कम हुई
2. व्यापार लागत में कमी
- ट्रेड कॉस्ट करीब 15% तक कम हुई
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में सुधार हुआ
3. वैश्विक वैल्यू चेन में भागीदारी
- भारतीय कंपनियों की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी बढ़ी
- विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला
4. किसानों और उत्पादकों को अप्रत्यक्ष लाभ
- निर्यात बढ़ने से कृषि और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की मांग बढ़ी
- बेहतर लॉजिस्टिक्स से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बनी
आरोप, राजनीति और हकीकत
ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट अपने आप में भारत के लिए नुकसानदेह नहीं था, लेकिन खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के बिना यह किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता था।
- यूपीए सरकार ने अस्थायी समाधान के साथ आगे बढ़ने की सहमति दी
- मोदी सरकार ने स्थायी समाधान पर जोर देकर समझौते को रोका
- अंततः किसानों और गरीबों के हित सुरक्षित कर TFA लागू किया गया
आज TFA से भारत को व्यापारिक लाभ मिल रहा है, और MSP व PDS जैसी योजनाएं भी सुरक्षित हैं।
यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ एक ट्रेड डील नहीं, बल्कि किसानों के हक और भारत की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।











