नई दिल्ली - बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा हम संतुष्ट हैं कि विवादित एसआईआर प्रक्रिया अनुपातिकता की कसौटी पर खरी उतरती है।
पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है की निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया अपनाकर अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर काम किया है। हम मानते हैं कि चुनावी एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता को ताकत देता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग को संवैधानिक प्रावधानों और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण करने का अधिकार है।










