उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) द्वारा हाल ही में भंडाफोड़ किए गए आतंकी मॉड्यूल में चौंकाने वाले नए खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के हाथ एक महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य लगा है, जो सीधे तौर पर सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स के कनेक्शन की पुष्टि करता है। यह वीडियो सबूत इस बात का गवाह है कि कैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर भारत के युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाया जा रहा था।
पाकिस्तानी हैंडलर का वीडियो साक्ष्य और डिजिटल साजिश
जांच एजेंसियों को करीब 25 सेकंड का एक वीडियो प्राप्त हुआ है, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर भारत में मौजूद अपने गुर्गों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विध्वंसक गतिविधियों के निर्देश देता नजर आ रहा है। वीडियो में हैंडलर चेहरे पर काला चश्मा लगाए और हाथ में हथियार लहराते हुए दिखाई दे रहा है। वह पपला पंडित सहित नेटवर्क के अन्य सदस्यों को आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए प्रेरित कर रहा है। एटीएस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी और उनके हैंडलर्स संवाद के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ही उपयोग करते थे। वर्तमान में इस वीडियो की रिकॉर्डिंग की तारीख और इसके पीछे के विशेष उद्देश्यों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

मुंबई में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का मुख्य एजेंडा
इस जांच में एक बेहद गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि इस नेटवर्क का प्राथमिक उद्देश्य देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दहशत और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। हैंडलर ने लोकेश और उसके साथी विकास को विशेष रूप से मुंबई भेजा था। उन्हें वहां के शोरूम और वाहनों में आग लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इस साजिश का मुख्य एजेंडा हिंदू समुदाय को निशाना बनाना था, ताकि पूरे देश में सांप्रदायिक विद्वेष और भय का माहौल बनाया जा सके। आतंकी नेटवर्क वीडियो कॉल के माध्यम से ही इन तमाम साजिशों की रूपरेखा और रणनीति तैयार करता था।
पैसों का लालच और हथियारों की तस्करी का जाल
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लोकेश और विकास जैसे युवाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने के लिए भारी भरकम रकम का लालच दिया गया था। उन्हें झांसा दिया गया था कि आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बदले उन्हें मोटी धनराशि दी जाएगी। हालांकि, मुंबई में पुलिस की सख्ती और पकड़े जाने के डर से वे शोरूम्स को आग लगाने की घटना को अंजाम नहीं दे पाए। सिर्फ आगजनी ही नहीं, बल्कि इस मॉड्यूल को पंजाब के गुरदासपुर से अवैध हथियारों की खेप लाने और उसे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इसके साथ ही, देश की परिवहन व्यवस्था को बाधित करने के लिए ट्रेन के सिग्नल जलाने जैसे खतरनाक टास्क भी इनके एजेंडे में शामिल थे।
पेशेवर ट्रेनिंग और ब्रेनवॉश की कार्यप्रणाली
पाकिस्तानी हैंडलर के काम करने का तरीका किसी पेशेवर आतंकी संगठन जैसा था। वह सबसे पहले स्थानीय सहयोगियों का मानसिक ब्रेनवॉश करता था और उन्हें ट्रेनिंग देता था। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे काम सौंपे जाते थे ताकि उनका विश्वास जीता जा सके और उनकी कार्यक्षमता परखी जा सके। लोकेश और विकास को भी इसी प्रक्रिया से गुजारा गया था। जब वे छोटे टास्क में सफल हुए, तब उन्हें बड़ी आतंकी घटनाओं के निर्देश दिए गए। लेकिन इससे पहले कि वे किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम दे पाते, यूपी एटीएस की मुस्तैदी ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
खुफिया तंत्र और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
इस बड़े खुलासे ने स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह चिंता का विषय है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और साजिश की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग सकी। बीते 28 तारीख को जब एटीएस ने लोकेश और विकास को ग्रेटर नोएडा के बादलपुर थाना क्षेत्र के छपरौला गांव से गिरफ्तार किया, तब भी स्थानीय पुलिस इस कार्रवाई से पूरी तरह बेखबर थी। फिलहाल, एटीएस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए जुटी हुई हैं, ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य चेहरों और स्लीपर सेल्स की पहचान की जा सके।











