नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में वरिष्ठ सांसदों को विदाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की और नए सांसदों को उनसे सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि राजनीति ऐसा क्षेत्र है जहां कभी फुल स्टॉप नहीं होता, और लोकतंत्र में अनुभव ही असली पूंजी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कहा कि सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है और प्रत्येक सदस्य की इसमें अनूठी भूमिका होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर सदस्यों के बीच सम्मान की भावना पैदा होती है। पीएम ने विशेष रूप से उन नेताओं का उल्लेख किया जो अपने कार्यकाल के दौरान समाज और संसदीय कार्य में गहरा योगदान दे चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं जैसे पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार का हवाला देते हुए कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसद को समर्पित किया। उन्होंने नए सांसदों से अपील की कि वे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ उठाएं। पीएम मोदी ने कहा कि सदन में समर्पित भाव से आना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना उन सभी बातों में शामिल है, जो वरिष्ठ नेताओं से सीखने योग्य हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की कार्यशैली की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हरिवंश जी ने शांत, विनम्र और संयमित तरीके से सदन का संचालन किया और देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया।
प्रधानमंत्री ने हास्य और व्यंग्य के अंदाज में रामदास आठवले का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे राज्यसभा छोड़ रहे हैं, लेकिन उनकी व्यंग्यपूर्ण शैली सदन में हमेशा याद रहेगी। उन्होंने कहा कि दो साल के अंतराल में राज्यसभा से वरिष्ठ सांसदों का समूह रिटायर होता है, और नए एवं पुराने सदस्यों के बीच अनुभव का आदान-प्रदान लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करता है।
पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि राज्यसभा में बने रहने वाले वरिष्ठ सदस्य नए सांसदों को अपने अनुभव का लाभ देंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और नए सांसदों को वरिष्ठ नेताओं की सीख और मार्गदर्शन मिलना जारी रहेगा।











