ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। एलपीजी सप्लाई में आई बाधा के कारण देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर की किल्लत हो रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को लंबी कतारों में लगकर महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक पर पड़ रहा है।
एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता में आई इस अनिश्चितता का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर भी दिखने लगा है। चाय बेचने वाले दुकानदारों ने लागत बढ़ने के कारण चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है। रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री पहले से ही महंगे कमर्शियल गैस के दबाव में थी, लेकिन अब यह संकट डेयरी सेक्टर तक पहुंच गया है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से मंगाता है। पहले भारत की बड़ी निर्भरता खाड़ी देशों पर थी, लेकिन मौजूदा हालात में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव ने आयात को प्रभावित किया है, जिससे घरेलू और औद्योगिक गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।
डेयरी उद्योग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है। दूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चराइजेशन प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में एलपीजी की जरूरत होती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण छोटे और मध्यम डेयरी प्लांट्स को उत्पादन और प्रोसेसिंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर समय पर गैस नहीं मिली, तो दूध के खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई डेयरी यूनिट्स के पास सीमित दिनों का ही पैकेजिंग स्टॉक बचा है। प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्ट्रियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं, और गैस की कमी के कारण उनका उत्पादन धीमा हो गया है। इससे आने वाले दिनों में बाजार में पैकेज्ड दूध की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
डेयरी संचालकों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो दूध की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी देखने को मिल सकती है। पहले से ही होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर दूध की खपत कम कर रहे हैं, जिससे डेयरी कारोबार पर दोहरा दबाव बन रहा है। कई छोटे डेयरी ऑपरेटर दूध को कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो गए हैं क्योंकि उनके पास स्टोरेज की पर्याप्त सुविधा नहीं है।
इस संकट के बीच डेयरी मालिकों ने सरकार से मांग की है कि कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि दूध एक जरूरी खाद्य पदार्थ है और इसकी सप्लाई बाधित नहीं होनी चाहिए। हालांकि कुछ किसान वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत जैसे बायोगैस अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह अभी संभव नहीं है।
फिलहाल यह संकट अस्थायी माना जा रहा है, लेकिन इसका असर तेजी से आम लोगों तक पहुंच रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में दूध जैसी बुनियादी जरूरत भी महंगी या दुर्लभ हो सकती है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह समय रहते ठोस कदम उठाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।











