घाघरा//डेस्क: झारखंड के घाघरा प्रखंड क्षेत्र में निजी स्कूलों की मनमानी अब अपनी सारी सीमाएं लांघती नजर आ रही है. नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही स्कूलों ने री-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूलने का खेल शुरू कर दिया है. एक ही विद्यालय में वर्षों से पढ़ रहे बच्चों से हर साल दोबारा प्रवेश शुल्क मांगना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है, जिसने स्थानीय अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. अभिभावकों का स्पष्ट आरोप है कि यह केवल एक सामान्य फीस वृद्धि नहीं है, बल्कि एक संगठित "री-एडमिशन रैकेट" है, जिसके जरिए शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे हजारों रुपये ऐंठे जा रहे हैं.
शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त इस विसंगति के कारण अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं. कई अभिभावकों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा उन पर सीधा दबाव बनाया जाता है कि यदि समय रहते री-एडमिशन फीस जमा नहीं की गई, तो बच्चे का नाम स्कूल से काट दिया जाएगा. नाम कटने के इसी डर के साए में अभिभावक कर्ज लेकर या अपनी जमा-पूंजी खर्च कर स्कूल की मांगें पूरी करने को मजबूर हैं. एक पीड़ित अभिभावक ने तीखी नाराजगी जताते हुए इसे पढ़ाई नहीं बल्कि "सीधा ब्लैकमेल" करार दिया है. विकास शुल्क और किताब-कॉपी के नाम पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रहा है.
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि घाघरा प्रखंड की हर गली में खुले निजी स्कूल अब शिक्षण संस्थान न रहकर महज 'वसूली केंद्र' बनकर रह गए हैं. छोटे से लेकर बड़े, लगभग सभी निजी स्कूलों का रवैया एक जैसा ही है, जहां री-एडमिशन के नाम पर हजारों की वसूली को अनिवार्य बना दिया गया है. इस मुद्दे की गूंज अब सड़कों से लेकर प्रशासन के गलियारों तक सुनाई देने लगी है. स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने घाघरा और गुमला जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
अभिभावकों की मांग है कि री-एडमिशन फीस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए और सभी निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की जाए. लोगों का कहना है कि यदि दोषी स्कूल प्रबंधनों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का स्थान पूरी तरह से "लूट की पढ़ाई" ले लेगी. अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर कब तक संज्ञान लेता है और अभिभावकों को इस निरंतर हो रहे शोषण से मुक्ति दिला पाता है.











