JHARKHAND RASON CARD: सरकार गरीबी रेखा से निचे के लोगों को हर महीने मुफ्त में राशन देने का काम वर्षों से करते आयी है। लेकिन इसका फायदा अयोग्य व्यक्ति भी उठाने का काम कर रहें हैं ऐसे में सरकार ने इस प्रकार कड़ा कदम उठाने का काम कर रही है। बात करें झारखंड में सरकारी योजना का लाभ उठा रहे 6.29 लाख से अधिक अपात्र कार्डधारकों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई की जा रही है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चलाये जा रहे जांच अभियान में अब तक लगभग 1.63 लाख अपात्रों के कार्ड रद्द किये जा चुके हैं. 25 अगस्त की समय-सीमा में केवल तीन दिन बचे हैं और 4.66 लाख अपात्रों पर कार्रवाई लंबित है. इधर, केंद्र सरकार द्वारा लागू एनएफएसए 2 व्यवस्था के तहत डिजिटल सत्यापन और सरकारी डाटाबेस मिलान के जरिए अपात्र लाभुकों के नाम स्वतः हटाये जा रहे हैं. भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राइटफुट टारगेटिंग योजना के तहत झारखंड के 6,29,973 अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड निरस्त करने के निर्देश दिये हैं.
केंद्र का फरमान अपात्रों के नाम नहीं हटे तो रुक सकता है अनाज कोटा
केंद्र सरकार ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि 31 अगस्त तक इन अपात्रों के नाम सूची से नहीं हटाये गये, तो इस संख्या के अनुपात में राज्य के अनाज कोटा रोक दिया जायेगा. इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव ने सभी जिला उपायुक्तों को 25 अगस्त तक हर हाल में कार्रवाई पूरी करने का पत्र जारी किया है.
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
केंद्र सरकार द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में पाया गया है कि गरीब कल्याण योजना के तहत 1,272 सरकारी कर्मचारी, 1,84,810 आयकरदाता और 15,493 बड़े कारोबारी मुफ्त राशन उठा रहे थे. इसके अलावा 13,087 कंपनियों के मालिक, 21,442 चारपहिया वाहन स्वामी, 1,10,142 डुप्लीकेट कार्डधारक और छह महीने से अधिक समय से राशन नहीं उठाने वाले 1,77,751 लोग भी अपात्र पाये गये हैं.








