हमारे शरीर में गर्दन के निचले हिस्से में तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जिसे थायराइड ग्लैंड कहते हैं। यह छोटी सी ग्रंथि हमारे पूरे शरीर की कार्यप्रणाली, खासकर मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। अक्सर थायराइड के मरीज यह शिकायत करते हैं कि उनकी भूख में अचानक बदलाव आ गया है।
मेडिकल साइंस और एक्सपर्ट्स के अनुसार, थायराइड का भूख से गहरा संबंध है। आइए विस्तार से समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
थायराइड के दो रूप: मेटाबॉलिज्म पर इनका असर
थायराइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, और दोनों का भूख पर विपरीत असर पड़ता है:
प्रकार | स्थिति | मेटाबॉलिज्म की गति | भूख पर असर |
हाइपोथायरॉइडिज्म | हार्मोन का कम बनना | धीमी (Slow) | भूख कम लगना |
हाइपरथायरॉइडिज्म | हार्मोन का अधिक बनना | तेज (Fast) | भूख ज्यादा लगना |
भूख कम या ज्यादा क्यों लगती है?
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के पूर्व रेजिडेंट डॉ. दीपक कुमार सुमन के अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता है:
1. हाइपोथायरॉइडिज्म (भूख में कमी)
जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम बनता है, तो मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। इस स्थिति में शरीर बहुत धीरे-धीरे कैलोरी बर्न करता है। चूंकि ऊर्जा की खपत कम होती है, इसलिए शरीर को अधिक भोजन की आवश्यकता महसूस नहीं होती और मरीज को भूख कम लगने लगती है। भूख कम लगने के बावजूद इस स्थिति में वजन बढ़ने की समस्या देखी जाती है।
2. हाइपरथायरॉइडिज्म (भूख में बढ़ोतरी)
इसमें थायराइड ग्रंथि अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और मेटाबॉलिज्म की रफ्तार बढ़ जाती है। शरीर बहुत तेजी से कैलोरी बर्न करने लगता है। ऊर्जा की इस भारी खपत को पूरा करने के लिए मस्तिष्क बार-बार खाने का संकेत देता है, जिससे मरीज को तेज भूख लगती है।
ज्यादा खाने के बाद भी वजन क्यों घटता है?
हाइपरथायरॉइडिज्म के मरीजों में एक अजीब विरोधाभास देखा जाता है—उन्हें भूख ज्यादा लगती है, वे खाते भी खूब हैं, लेकिन उनका वजन घटने लगता है। इसका कारण यह है कि शरीर में ऊर्जा की खपत (Energy Expenditure) इतनी अधिक होती है कि ली गई कैलोरी भी कम पड़ जाती है। वजन घटने के साथ-साथ मरीजों में ये लक्षण भी दिख सकते हैं:
- अत्यधिक पसीना आना
- घबराहट और बेचैनी
- दिल की धड़कन (Palpitations) तेज होना
एक्सपर्ट की सलाह: खान-पान में क्या सावधानी बरतें?
डॉ. दीपक कुमार सुमन के अनुसार, थायराइड को मैनेज करने में डाइट की अहम भूमिका होती है:
- प्रोटीन और सब्जियां: थायराइड के मरीजों को अपनी डाइट में उच्च प्रोटीन और हरी पत्तेदार सब्जियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- कैफीन से दूरी: हाइपरथायरॉइडिज्म के मरीजों को चाय, कॉफी और अन्य कैफीन युक्त पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये घबराहट और दिल की धड़कन को और बढ़ा सकते हैं।
- नियमित जांच: अगर आपको अपनी भूख या वजन में अचानक और लगातार बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत ब्लड टेस्ट (TSH, T3, T4) करवाएं और डॉक्टर से परामर्श लें।
निष्कर्ष: थायराइड में भूख का घटना या बढ़ना केवल एक लक्षण नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म का सिग्नल है। सही इलाज और संतुलित आहार से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।











