भारतीय शेयर बाजार में चार महीने से जारी गिरावट का सिलसिला आखिरकार मार्च 2026 में थम गया है, जो निवेशकों के लिए एक बड़े और ऐतिहासिक अवसर की ओर इशारा कर रहा है। DSP म्यूचुअल फंड और क्वांट म्यूचुअल फंड जैसे बड़े संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 50 के इतिहास में चार महीने या उससे अधिक समय तक चलने वाली गिरावट बेहद दुर्लभ रही है और जब भी ऐसा हुआ है, बाजार ने उसके बाद जोरदार वापसी की है। ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पिछले छह ऐसे मामलों में, जहां गिरावट चार महीने से ज्यादा रही, इंडेक्स ने अगले एक साल में औसतन 40.7 प्रतिशत का भारी-भरकम रिटर्न दिया है। लघु अवधि में भी यह तेजी काफी प्रभावी रही है, जिसमें तीन महीनों का औसत लाभ 12.2 प्रतिशत और छह महीनों में 22.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति कोविड-19 के बाद खरीदारी का सबसे बड़ा और सबसे बेहतर मौका साबित हो सकती है। क्वांट म्यूचुअल फंड ने अपने ताजा विश्लेषण में 'कैपिटुलेशन' के संकेतों का जिक्र किया है, जिसका अर्थ है कि निवेशक अब बिकवाली के चरम पर पहुंच चुके हैं और बाजार का सबसे बुरा दौर पीछे छूट गया है। फंड के अनुसार, भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर चीन की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रही है, जो भारतीय इक्विटी को वैश्विक स्तर पर एक आकर्षक विकल्प बनाती है। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील को भी बाजार के लिए भविष्य का बड़ा उत्प्रेरक माना जा रहा है।
स्मार्ट मनी के रुख में भी बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। देश के बड़े फंडों में से एक, ICICI प्रूडेंशियल बैलेंस्ड एडवांटेज फंड ने इक्विटी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 61.9 प्रतिशत कर दी है, जो पिछले पांच वर्षों का उच्चतम स्तर है। फंड हाउस का मानना है कि वर्तमान वैल्यूएशन और बाजार की भावनाएं अब निवेश के पक्ष में हैं, इसलिए यह पोर्टफोलियो को धीरे-धीरे बढ़ाने का सही समय है। इससे पहले इस स्तर का निवेश जून 2020 में देखा गया था, जिसके बाद बाजार ने एक ऐतिहासिक तेजी का गवाह बना था।
इतिहास का पैटर्न स्पष्ट करता है कि गिरावट जितनी लंबी होती है, रिकवरी उतनी ही शक्तिशाली होती है। उदाहरण के तौर पर, जनवरी 1991 में चार महीने की गिरावट के बाद निफ्टी ने अगले साल 117.9 प्रतिशत की छलांग लगाई थी। हालांकि, विशेषज्ञों ने निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह भी दी है, क्योंकि हर बार रिकवरी तुरंत नहीं होती। 1998 के मामले में छह महीने तक रिटर्न मामूली रहा था, लेकिन साल के अंत तक वह 65 प्रतिशत से अधिक हो गया था। वर्तमान में कॉर्पोरेट कमाई के चक्र में सुधार और आरबीआई की स्थिर नीतिगत दरों के बीच, लार्ज-कैप शेयरों में बढ़ती लिक्विडिटी बाजार के अगले बुल रन की नींव रख रही है।









