रांची: झारखंड की राजधानी रांची और इसके आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले कुछ दिनों से जारी ईंधन की किल्लत अब एक विकराल संकट का रूप ले चुकी है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गतिविधियां भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं। शहर के बाहरी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और तेल के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
इस संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई पेट्रोल पंप संचालकों ने तेल की बिक्री पर सीमा (रैशनिंग) तय कर दी है। शहर से सटे इलाकों में दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए पेट्रोल की बिक्री को अधिकतम 500 रुपये तक सीमित कर दिया गया है। वहीं, व्यावसायिक वाहनों के लिए डीजल की किल्लत और भी गहरी है। ट्रक और बस चालकों का आरोप है कि उन्हें जरूरत के हिसाब से ईंधन नहीं मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर, जहां 50 लीटर डीजल की मांग की जा रही है, वहां पंप कर्मी केवल 30 लीटर ही तेल दे रहे हैं। इस कटौती की वजह से लंबी दूरी के वाहनों और माल ढुलाई वाले ट्रकों के पहिये थमने की कगार पर पहुंच गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि संकट के बीच शहर के भीतर और बाहर की तस्वीरों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां बाहरी इलाकों में बूंद-बूंद तेल के लिए मारामारी है और 500 रुपये की पाबंदी लागू है, वहीं शहर के कुछ चुनिंदा पंपों पर अब भी गैलन और डिब्बों में तेल भरकर दिया जा रहा है। वितरण में दिख रही इस असमानता ने प्रशासन और तेल कंपनियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम उपभोक्ताओं में इस बात को लेकर भारी रोष है कि क्या संकट के समय में भी कुछ खास केंद्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
पंप संचालकों ने इस पूरी अव्यवस्था का ठीकरा तेल कंपनियों के सिर फोड़ा है। संचालकों का दावा है कि कंपनियों की ओर से आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। उनके अनुसार, लगातार डिमांड नोट भेजे जाने के बावजूद तेल डिपो से टैंकरों की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है। स्टॉक खत्म होने के डर से पंप मालिकों ने मजबूरी में 30 लीटर डीजल और अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल की सीमा तय करने का निर्णय लिया है, हालांकि कई जगहों पर स्थिति इससे भी कहीं अधिक खराब है।
इस संकट के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो यह समस्या टैंकरों की अनियमित आपूर्ति और लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण उत्पन्न हुई है। मांग में अचानक आई तेजी और वितरण श्रृंखला में प्रबंधन की कमी ने आग में घी डालने का काम किया है।
ईंधन के इस अभाव का असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है। माल ढुलाई प्रभावित होने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका प्रबल हो गई है। ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है। यदि आपूर्ति व्यवस्था को जल्द ही दुरुस्त नहीं किया गया, तो निर्माण कार्य, छोटे उद्योग और यहां तक कि आपातकालीन सेवाओं पर भी इसका व्यापक और नकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल, रांची के नागरिक अनिश्चितता के माहौल में इस उम्मीद के साथ इंतजार कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर हालात सामान्य करेगा।









