रांची डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की मुस्तैदी से एक 13 साल की मासूम बच्ची को बाल विवाह के दलदल में धकेलने से बचा लिया गया है। पिठोरिया की रहने वाली इस बच्ची की शादी उसके माता-पिता ने अत्यधिक गरीबी और लालन-पोषण की असमर्थता के कारण उत्तर प्रदेश के एक 45 वर्षीय अधेड़ व्यक्ति से तय कर दी थी।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब शादी के डर से घबराकर बच्ची घर से भागकर बुंडू पहुंच गई। वहां एक पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद तत्काल डालसा सचिव को इसकी सूचना दी गई। झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और रांची सिविल कोर्ट के न्यायायुक्त के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई की गई। टीम ने बुंडू महिला थाना की पुलिस अवर निरीक्षक बुलबुल कुमारी के सहयोग से बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
फिलहाल बच्ची को चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से रांची स्थित 'प्रेमाश्रय' में सुरक्षित रखा गया है। पूछताछ के दौरान बच्ची ने अपनी इच्छा जाहिर की है कि वह आगे पढ़ना चाहती है और सिलाई का प्रशिक्षण लेना चाहती है। उसकी इस इच्छा को देखते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के माध्यम से उसके प्रशिक्षण और आवासीय विद्यालय में दाखिले की तैयारी की जा रही है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस विवाह को गोला निवासी लुतेश कुमार महतो ने तय कराया था। इस गंभीर मामले को देखते हुए डालसा सचिव ने बुंडू महिला थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि बच्ची के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और इस अवैध शादी में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।











