रांची// झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के पेपर लीक कांड में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। इस बहुचर्चित मामले में जेल में बंद 28 आरोपियों की जमानत याचिका पर अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल कोई भी राहत देने से इनकार किया है और पुलिस से विस्तृत केस डायरी की मांग की है। अब इस जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
ज्ञात हो कि बीते बुधवार को 20 आरोपियों ने अदालत में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ बीते शनिवार को एक व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया था, जिसके परिणामस्वरूप कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी को सोमवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसका जाल कई राज्यों तक फैला हुआ है। गिरोह के मास्टरमाइंडों में अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।
पुलिस की तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस रैकेट में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी थी, जिसमें अब तक 7 महिला आरोपियों की संलिप्तता पाई गई है। यह गैंग अभ्यर्थियों से नौकरी के बदले 15-15 लाख रुपये वसूलने का सौदा करता था। गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी; परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को रड़गांव स्थित एक गुप्त ठिकाने पर इकट्ठा किया गया था, जहां उन्हें प्रश्न और उत्तर रटवाए जा रहे थे।
धोखाधड़ी को पुख्ता करने के लिए आरोपियों ने अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और मूल एडमिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए थे। इतना ही नहीं, सुरक्षा के तौर पर कई अभ्यर्थियों से ब्लैंक बैंक चेक भी अपने नाम पर भरवा लिए गए थे ताकि बाद में वसूली सुनिश्चित की जा सके। इस पूरे संगठित अपराध के खिलाफ तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन अब इस गिरोह के अन्य कड़ियों को जोड़ने और मुख्य सरगनाओं के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में जुटा है।











