हाल ही में अमेरिका के नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (NHANES) द्वारा किए गए एक व्यापक शोध में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि रात 9 बजे के बाद भारी भोजन करना आपकी आंतों की सेहत (गट हेल्थ) के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। 11 हजार से अधिक लोगों पर आधारित इस अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि देर रात खाना खाने की आदत न केवल पाचन तंत्र को बिगाड़ती है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का मार्ग भी प्रशस्त करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और रात 9 बजे के बाद अपनी दैनिक कैलोरी का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लेते हैं, उनमें कब्ज और अन्य पेट संबंधी रोगों का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 1.7 गुना तक बढ़ जाता है।
इस शोध की मुख्य लेखिका डॉ. हरिका दादिगिरी के अनुसार, स्वस्थ रहने के लिए केवल यह जरूरी नहीं है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि भोजन का समय और उसकी मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया के पीछे का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण 'गट-ब्रेन कनेक्शन' है। चिकित्सा विज्ञान में यह माना जाता है कि हमारा मस्तिष्क और पाचन तंत्र आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। जब कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है, तो उसका सीधा असर आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया पर पड़ता है। तनाव के दौरान शरीर में होने वाले रासायनिक बदलाव पाचन को धीमा कर देते हैं, जिससे कब्ज जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। जब एक तनावग्रस्त व्यक्ति देर रात को भारी भोजन करता है, तो यह स्थिति "आग में घी" का काम करती है और पेट की समस्याओं को कई गुना बढ़ा देती है।
रात के समय शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। हमारी मेटाबॉलिक एक्टिविटी और आंतों की गतिशीलता (गट मूवमेंट) दिन की तुलना में काफी कम होती है। ऐसे में यदि देर रात भारी भोजन किया जाए, तो शरीर उसे पूरी तरह पचाने में असमर्थ रहता है, जिसके परिणामस्वरूप भोजन आंतों में लंबे समय तक रुका रहता है और सड़ने लगता है। यही कारण है कि देर रात खाने वाले लोग अक्सर सुबह उठने पर भारीपन, गैस और पुरानी कब्ज की शिकायत करते हैं। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन सीधे तौर पर कारण और प्रभाव को साबित नहीं करता, लेकिन देर रात के भोजन और खराब स्वास्थ्य के बीच एक मजबूत संबंध की ओर इशारा जरूर करता है।
पाचन तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है कि रात का भोजन हल्का और सोने से कम से कम दो-तीन घंटे पहले कर लिया जाए। इसके साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी अनिवार्य है क्योंकि शांत मस्तिष्क ही बेहतर पाचन सुनिश्चित कर सकता है। दैनिक जीवन में योग, नियमित सैर और ध्यान (मेडिटेशन) को शामिल करके तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, पर्याप्त नींद लेना भी शरीर की रिकवरी के लिए बहुत जरूरी है, जिससे मेटाबॉलिज्म सुचारू रूप से कार्य करता रहता है और पेट संबंधी विकारों की संभावना न्यूनतम हो जाती है।











