8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन पर पीएमएलए की विशेष अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी ओर से आंशिक बहस पेश की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दलीलें पहले ही पूरी की जा चुकी हैं, जिसमें उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए अदालत से आरोप मुक्त करने की गुहार लगाई है। अब ईडी की ओर से चल रही बहस के संपन्न होने के बाद अदालत इस पर अपना फैसला सुनाएगी कि मामले में आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे या नहीं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया था जब ईडी ने लंबी जांच और कई दौर की छापेमारी के बाद हेमंत सोरेन सहित करीब डेढ़ दर्जन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच एजेंसी ने इस जमीन घोटाले में संलिप्तता के आरोप में मुख्यमंत्री और कई जमीन कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गौरतलब है कि 5 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई इस याचिका के जरिए मुख्यमंत्री ने खुद को मामले से अलग करने की मांग की है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 31 जनवरी 2024 को हुई थी, जब घंटों की पूछताछ के बाद ईडी ने हेमंत सोरेन को उनके आवास से गिरफ्तार किया था। लगभग पांच महीने जेल में रहने के बाद, 28 जून 2024 को झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत प्रदान की थी। फिलहाल सभी की निगाहें शनिवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां ईडी अपनी शेष दलीलें पेश करेगी। इसके बाद ही तय होगा कि मुख्यमंत्री को इस कानूनी शिकंजे से राहत मिलती है या उन्हें ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।











