हजारीबाग, झारखंड: जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुसुम्भा में 24/25 मार्च 2026 की रात मंगला जुलूस के दौरान एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या के मामले का पुलिस ने पूरी तरह से खुलासा कर दिया है। इस जघन्य घटना को लेकर झारखंड के डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी साझा की, जिसमें सामने आया कि बच्ची की हत्या अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर सुनियोजित तरीके से की गई थी।
घटना के संबंध में बताया गया कि 25 मार्च 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे विष्णुगढ़ थाना को सूचना प्राप्त हुई कि कुसुम्भा गांव के मिडिल स्कूल के पीछे स्थित मैदान में बांस झाड़ी के पास एक बच्ची का शव पड़ा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मृतका पिछली रात 24 मार्च को मंगला जुलूस के दौरान लापता हो गई थी।
इस मामले में मृतका की मां रेशमी देवी (उम्र लगभग 35 वर्ष), पति बिनोद कुमार सिंह, निवासी कुसुम्भा के लिखित आवेदन के आधार पर धनेश्वर पासवान समेत अन्य अज्ञात के विरुद्ध नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने का मामला दर्ज किया गया। यह मामला विष्णुगढ़ थाना कांड संख्या 42/26 दिनांक 25.03.2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं पोक्सो एक्ट की धारा 4/6 में दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च 2026 को झारखंड के पुलिस महानिदेशक एवं हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी श्री नागरगोजे शुभम भाउसाहेब ने किया। टीम में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बैद्यनाथ प्रसाद, डीएसपी अनुभव भारद्वाज, डीएसपी प्रशांत कुमार, विष्णुगढ़ थाना प्रभारी सपन कुमार महथा, महिला थाना प्रभारी विन्ध्यवासिनी कुमारी सिन्हा, दारू थाना प्रभारी मो. इकबाल हुसैन, टाटीझरिया थाना प्रभारी इन्द्रजीत कुमार, बड़कागांव थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह समेत कई पुलिस पदाधिकारी एवं तकनीकी शाखा के कर्मी शामिल थे।
एसआईटी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर गहन जांच की। जांच के क्रम में भीम राम, मृतका के परिजनों और गांव की महिला शांति देवी उर्फ भगतिनी से पूछताछ की गई। पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह बेहद चौंकाने वाला और मानवता को शर्मसार करने वाला है।
जांच में सामने आया कि मृतका की मां पिछले एक वर्ष से अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं को लेकर शांति देवी उर्फ भगतिनी के संपर्क में थी। भगतिनी, जो खुद को तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक करने वाली बताती थी, ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि उसके बेटे की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब किसी कुंवारी लड़की की बलि दी जाए।
इतना ही नहीं, भगतिनी ने यह भी कहा कि उसकी छोटी बेटी पर “माता सवार” रहती है, इसलिए उसकी बलि देना अधिक प्रभावी होगा। इस अंधविश्वास में आकर मां ने अपनी ही बेटी को बलि देने के लिए सहमति दे दी। पिछले तीन महीनों से इस साजिश की तैयारी चल रही थी और रामनवमी के अष्टमी के दिन को इसके लिए तय किया गया था
घटना की रात 24 मार्च को मंगला जुलूस के दौरान शाम करीब 7 बजे रेशमी देवी अपने तीनों बच्चों के साथ जुलूस में शामिल हुई। कुछ समय बाद वह अपनी छोटी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। वहां भगतिनी ने रात 9 बजे के बाद “अच्छा नक्षत्र” आने की बात कहकर बच्ची को बाद में लाने को कहा और यह भी कहा कि एक पुरुष की जरूरत होगी।
तय समय पर रात करीब 9:30 बजे रेशमी देवी, भीम राम के साथ अपनी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। वहां मनसा मंदिर में तंत्र-मंत्र के साथ पूजा की गई, बच्ची को सिंदूर, काजल लगाया गया और प्रसाद के रूप में इलायची दी गई।
इसके बाद तीनों आरोपी बच्ची को बांसवाड़ी में ले गए, जहां पहले से बोरा और प्लास्टिक बिछाया गया था। वहां बच्ची को जमीन पर सुलाकर तंत्र क्रिया शुरू की गई। भगतिनी ने “देवता आने” का दावा करते हुए कुंवारी लड़की के खून की मांग की। इसी दौरान भीम राम ने बच्ची का गला घोंट दिया और जब वह तड़पने लगी तो उसकी मां ने उसके पैर पकड़ लिए।
बच्ची की मौत सुनिश्चित होने के बाद भी आरोपियों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। भगतिनी के कहने पर बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य किए गए और फिर पत्थर से उसके सिर पर वार कर खून निकाला गया। उसी खून का उपयोग कथित तांत्रिक पूजा में किया गया और बाद में उसे मंदिर में छिड़का गया।
इस पूरे मामले में पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों—भीम राम (45 वर्ष), रेशमी देवी (35 वर्ष) और शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष)—को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपी कुसुम्भा गांव के ही निवासी हैं।
डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह मामला अंधविश्वास का बेहद खतरनाक उदाहरण है और पुलिस ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है और मामले की गहराई से जांच जारी है। यह घटना न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाली है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अंधविश्वास किस हद तक इंसान को हैवान बना सकता है।











