रिपोर्ट - उमेश कांत गिरि
घाटशिला में बन रहे लालडीह–गोपालपुर रेल ओवर ब्रिज को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट अब गुणवत्ता और पारदर्शिता के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों और मजदूरों के मुताबिक निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि लालडीह रेलवे क्रॉसिंग को बंद कर इसे गोपालपुर से जोड़ने के लिए बनाए जा रहे इस ओवर ब्रिज में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या करोड़ों की लागत वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में वास्तव में थर्ड क्लास से भी निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग इस पर आंख मूंदे बैठा है?

स्थानीय मजदूरों ने आरोप लगाया है कि इस्तेमाल किया जा रहा सीमेंट बेहद निम्न गुणवत्ता का है और इसी से कई पिलरों की ढलाई भी की जा चुकी है। इतना ही नहीं, ढलाई के दौरान आवश्यक रसायनों का प्रयोग भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निर्माण के बुनियादी मानकों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? अगर हां, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब काम में लगे मजदूरों ने ही गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए काम करने से इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब तक निर्धारित मापदंडों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं होगा, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। क्या मजदूरों का यह कदम किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है?

इस पूरे मामले में विभागीय अभियंता पार्थो की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनके सामने ही यह सब गड़बड़झाला हो रहा है। क्या एक जिम्मेदार अधिकारी की मौजूदगी में इस तरह की अनियमितताएं संभव हैं, या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का मामला है?
जब इस विषय पर निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे सुपरवाइजर सुधीर कुमार से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने न सिर्फ जवाब देने से इंकार कर दिया बल्कि आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि “काम मेरी मर्जी से चलेगा”। क्या यह बयान इस बात का संकेत नहीं देता कि प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी है? और अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो जानकारी देने से परहेज क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र सरकार के अधीन चल रहे इस करोड़ों के प्रोजेक्ट में गुणवत्ता की निगरानी आखिर कौन कर रहा है? क्या संबंधित विभाग और उच्च अधिकारी इस मामले से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर नजरें फेर ली गई हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है। क्या कुछ लोगों के लालच के कारण आम जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है? क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी, या यह भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?
अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। क्योंकि सवाल सिर्फ एक पुल के निर्माण का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा का है।











