गर्मियों के मौसम में कार सिर्फ सफर का जरिया नहीं रह जाती, बल्कि सीधी धूप में खड़ी होने पर यह किसी बंद भट्टी की तरह तपने लगती है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो यदि बाहर का तापमान 35°C है, तो बंद शीशों के कारण 'ग्रीनहाउस इफेक्ट' पैदा होता है, जिससे महज आधे घंटे के भीतर कार के केबिन का तापमान 50°C से 60°C तक जा सकता है। ऐसे में हम अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी सामान्य चीजें कार में छोड़ देते हैं, जो न केवल गाड़ी को नुकसान पहुँचा सकती हैं बल्कि जानलेवा हादसे का सबब भी बन सकती हैं।
सबसे चौंकाने वाला खतरा पानी की एक साधारण पारदर्शी बोतल से जुड़ा है। भौतिकी के नियम के अनुसार, पानी से भरी प्लास्टिक की बोतल एक 'मैग्नीफाइंग ग्लास' (आवर्धक लेंस) की तरह काम करने लगती है। जब सूरज की किरणें इस बोतल से गुजरती हैं, तो वे एक बिंदु पर केंद्रित हो जाती हैं। यदि यह केंद्रित प्रकाश कार की सीट या किसी कपड़े पर पड़ता है, तो वहां धुआं उठने और आग लगने में देर नहीं लगती। ठीक इसी तरह डैशबोर्ड पर रखे चश्मे या सनग्लासेस भी जोखिम बढ़ाते हैं, क्योंकि उनके लेंस रोशनी को केंद्रित कर प्लास्टिक की सतह को पिघला सकते हैं।
आज के दौर में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें तपती कार में छोड़ना खुद को खतरे में डालना है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और पावर बैंक में लगी लिथियम-आयन बैटरियां अत्यधिक तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। गर्मी के कारण ये बैटरियां फूल सकती हैं और 'थर्मल रनअवे' जैसी स्थिति पैदा होने पर इनमें विस्फोट भी हो सकता है। विशेष रूप से डैशबोर्ड, जहां सीधी धूप पड़ती है, इन उपकरणों के लिए सबसे असुरक्षित जगह है।
सुरक्षा के लिहाज से सैनिटाइजर और परफ्यूम जैसी चीजें भी कम घातक नहीं हैं। सैनिटाइजर में मौजूद अल्कोहल की उच्च मात्रा इसे अत्यधिक ज्वलनशील बनाती है, जो गर्मी पाकर तेजी से वाष्पित होकर आग पकड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर, डिओडोरेंट और एयर फ्रेशनर के डिब्बे दबाव (प्रेशराइज्ड कैन) में होते हैं। बढ़ते तापमान के साथ इनके भीतर का दबाव इतना बढ़ जाता है कि ये किसी बम की तरह फट सकते हैं। अपनी और अपनी गाड़ी की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि गर्मियों में कार से उतरते समय इन वस्तुओं को अपने साथ ले जाएं, क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही बड़े नुकसान में बदल सकती है।











