रांची : भगवान बिरसा जैविक उद्यान, राँची के लिए गौरव और हर्ष का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। उद्यान में लंबे अंतराल के बाद एशियाई शेर के कुनबे में वृद्धि हुई है, जहाँ एक नन्हीं मादा शावक अब चार माह की हो चुकी है। यह उपलब्धि उद्यान प्रबंधन के उन विशेष प्रयासों का परिणाम है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित नंदनवन जू एंड जंगल सफारी से एशियाई शेरों के एक जोड़े, नर 'अभय' और मादा 'सबरी' को जून 2025 में पशु आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत यहाँ लाया गया था। पूर्व में उद्यान के पुराने शेरों की वृद्धावस्था के कारण मृत्यु हो जाने से शेर का बाड़ा रिक्त हो गया था, जिसे इस नए जोड़े ने एक बार फिर जीवंत कर दिया है।
सफलता की यह कहानी 12 अगस्त 2025 को दोनों शेरों के सफल मिलन के साथ आगे बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप 28 नवंबर 2025 को मादा शेर 'सबरी' ने एक स्वस्थ मादा शावक को जन्म दिया। हालाँकि, जन्म के लगभग दस दिनों बाद शावक का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया और स्थिति चिंताजनक हो गई। नन्हीं शावक की जान बचाने के लिए उसे उसकी माँ से अलग कर जंतु अस्पताल के विशेष कक्ष में स्थानांतरित किया गया। यहाँ उद्यान के सहायक वन संरक्षक, पशु चिकित्सक, जीव वैज्ञानिकों और समर्पित वन कर्मियों की टीम ने दिन-रात एक कर उसका पालन-पोषण किया।
सतत निगरानी और विशेषज्ञ देखभाल के फलस्वरूप शावक अब पूरी तरह स्वस्थ है और चार माह की आयु प्राप्त कर चुकी है। बढ़ती उम्र को देखते हुए अब उसे उसकी माता 'सबरी' के समीप ही स्थित एक विशेष नर्सरी में रखा गया है। उद्यान प्रबंधन ने पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए शावक के दीदार के लिए एक आधुनिक व्यवस्था की है। चूँकि शावक को अभी सीधे मानवीय संपर्क से दूर रखना आवश्यक है, इसलिए पर्यटकों की सुविधा हेतु एक बड़ी टीवी स्क्रीन लगाई गई है, जिसके माध्यम से सीसीटीवी कैमरों की मदद से दर्शक शावक की अठखेलियों को देख सकेंगे।
इस गौरवशाली अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एचओएफएफ) संजीव कुमार सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने उद्यान की पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। यह नई अतिथि न केवल राँची के इस जैविक उद्यान की रौनक बढ़ाएगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में झारखंड के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।











