नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 'झाड़ू' का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चड्ढा अकेले नहीं हैं; उनके साथ 'आप' के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी पाला बदला है, जिससे उच्च सदन में आम आदमी पार्टी को जबरदस्त झटका लगा है।
'सही व्यक्ति, गलत पार्टी' का हवाला
भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले पर राघव चड्ढा ने एक भावुक और राजनीतिक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि वह काफी समय से महसूस कर रहे थे कि वह एक "गलत पार्टी में सही व्यक्ति" (Right man in wrong party) बनकर रह गए हैं। रोचक बात यह है कि राजनीति के गलियारों में यह जुमला कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए विपक्षी नेताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। 1996 के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वाजपेयी ने सदन में चुटकी लेते हुए इसका जवाब भी दिया था, जिसका जिक्र आज राघव चड्ढा के इस कदम के साथ फिर से ताजा हो गया है।
कानूनी पेच और विलय की प्रक्रिया
राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह दलबदल कानून के दायरे में रहकर किया गया एक संवैधानिक कदम है। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ पाला बदलते हैं, तो उसे दूसरी पार्टी में विलय माना जाता है और उन पर दलबदल कानून के तहत अयोग्यता लागू नहीं होती। इस संबंध में उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को औपचारिक पत्र और आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए हैं। चड्ढा के साथ भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शामिल हैं।
भाजपा का हमला और AAP की 'गद्दारी' वाली प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि सांसदों का यह कदम अरविंद केजरीवाल की कथित तानाशाही का नतीजा है। उन्होंने इसे केजरीवाल के नेतृत्व पर एक बड़ा सवालिया निशान बताया।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस कदम को पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है। पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन सांसदों को जनता ने सदन भेजा था, उन्होंने उस भाजपा का हाथ थाम लिया है जिसने किसान आंदोलन के दौरान किसानों का अपमान किया। उन्होंने इसे 'गद्दारी' बताते हुए कहा कि जनता चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।
पंजाब की राजनीति में मचेगा घमासान?
इस बगावत के बाद पंजाब में भगवंत मान सरकार की स्थिरता को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने मुख्यमंत्री मान को सदन में अपना बहुमत साबित करने की चुनौती दी है। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने संभावना जताई है कि इस बड़ी फूट के बाद पंजाब सरकार गिर सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा सांसदों का इस तरह सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ना न केवल राष्ट्रीय राजनीति बल्कि पंजाब के आगामी स्थानीय समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है।










