नई दिल्ली: राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर जो 'गृहयुद्ध' छिड़ा है, उसने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में भूचाल ला दिया है। कभी अरविंद केजरीवाल के 'हनुमान' और पार्टी के सबसे चमकते सितारे रहे राघव चड्ढा अब अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। नौबत यहाँ तक आ गई है कि पार्टी ने उन पर सीधे प्रधानमंत्री मोदी की 'गोद में बैठने' का आरोप जड़ दिया है।
"राघव के मुंह में दही जमी है..." - आतिशी का अब तक का सबसे कड़ा प्रहार
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP की कद्दावर नेता आतिशी ने TV9 भारतवर्ष के साथ एक विस्फोटक इंटरव्यू में राघव चड्ढा की वफादारी की धज्जियां उड़ा दीं। आतिशी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि राघव चड्ढा अब लोकतंत्र की लड़ाई से भाग चुके हैं।
आतिशी ने सीधे सवाल दागते हुए कहा:
"मैं राघव जी से पूछना चाहती हूँ कि उन्हें मोदी जी से इतना डर क्यों लगता है? जब पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही थी और विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रहे थे, तो राघव ने हस्ताक्षर करने से क्यों मना किया? क्या ईडी और सीबीआई का खौफ उन्हें सता रहा है?"
'सैलाब' की चुनौती और 'खामोशी' का रहस्य
विवाद तब और गहरा गया जब राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर पार्टी आलाकमान को सीधे चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें घेरा गया तो वह 'सैलाब' ला देंगे। इस पर पलटवार करते हुए आतिशी ने उनकी 'खामोशी' को हथिया बनाया। उन्होंने कहा कि जब संसद में महंगाई और LPG सिलेंडर के दामों पर चर्चा हो रही थी, तब राघव गायब थे। विपक्ष के वॉकआउट में शामिल न होकर उन्होंने संकेत दे दिया है कि उनका दिल अब 'कमल' के लिए धड़क रहा है।
क्या खत्म हुआ 'बेनिफिट ऑफ डाउट'?
राघव चड्ढा की लंबी अनुपस्थिति (लंदन में आंखों का ऑपरेशन) पर भी आतिशी ने तंज कसा। उन्होंने कहा:
- संदेह का लाभ: "हमने सोचा शायद सच में उनकी तबीयत खराब है, शायद ऑपरेशन जरूरी है।"
- सच्चाई का सामना: "लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। जब पार्टी के नेता जेल जा रहे थे, तब राघव गायब थे। आज उनके पक्ष में बीजेपी सांसद खड़े हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि स्क्रिप्ट कहाँ लिखी जा रही है।"
बड़ा सवाल: क्या राघव छोड़ेंगे AAP?
जब आतिशी से पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं और क्या पार्टी उन्हें रोकने की कोशिश करेगी, तो उन्होंने एक रहस्यमयी मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया:
"यह उनकी मर्जी है। वह अपनी राह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।"
आतिशी के इस बयान से साफ है कि AAP ने अब राघव चड्ढा के लिए अपने दरवाजे लगभग बंद कर लिए हैं।
सियासी समीकरण: क्या खोएगी AAP और क्या पाएगी BJP?
पहलू | संभावित असर |
AAP का नुकसान | पंजाब और युवाओं के बीच एक बड़ा चेहरा खोना। |
राघव का रुख | अपनी 'जन सरोकार' वाली राजनीति को नया मंच देना। |
BJP की रणनीति | 'आप' के भीतरी कलह को भुनाकर दिल्ली-पंजाब में बढ़त बनाना। |
निष्कर्ष
दिल्ली की राजनीति में यह हफ्ता निर्णायक साबित होने वाला है। एक तरफ राघव चड्ढा का 'सैलाब' लाने का दावा है और दूसरी तरफ आतिशी का 'गद्दारी' वाला वार। क्या राघव चड्ढा वाकई बीजेपी के 'मिशन दिल्ली' का हिस्सा बनेंगे या फिर यह किसी बड़े राजनीतिक समझौते की शुरुआत है?
देखते रहिए हर अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट।











