(चंदन वर्मा, संवाददाता)
रांची - जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित मामलों के निस्तारण का नया रिकॉर्ड बना। इस दौरान कुल 47,397 लंबित मामलों और 8,32,365 प्री-लिटिगेशन वादों का निस्तारण करते हुए 1,36,99,52,446.21 रुपये का सेटलमेंट किया गया।
कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने रांची न्यायमंडल से किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लंबित वादों के निस्तारण में अधिवक्ताओं और मध्यस्थों की भूमिका बेहद अहम है। लोक अदालत न केवल वादकारियों को त्वरित और नि:शुल्क न्याय उपलब्ध कराती है, बल्कि इससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। उन्होंने कहा कि पीएलवी (पारा लीगल वॉलंटियर्स) न्याय प्रणाली की रीढ़ हैं, जो गांव, कस्बों और दूरदराज क्षेत्रों में लोगों को विधिक जागरूकता प्रदान कर जरूरतमंदों तक न्याय पहुंचाने का काम कर रहे हैं। गौरतलब हो कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए कुल 60 बेंचों का गठन किया गया था। बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के साथ पूर्व समन्वय स्थापित कर वादकारियों को नोटिस भेजे गए थे, जिससे अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो सके। साथ ही कार्यक्रम के दौरान डायन-बिसाही थीम पर नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया, जिसके जरिए सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया।
वहीं कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने व्यवहार न्यायालय परिसर में दीदी कैफे, महात्मा गांधी प्रतिमा, वलनेरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेस रूम तथा क्यूआर कोड जनरेटेड एप्लिकेशन सिस्टम का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम में रंजना अस्थाना, राकेश रौशन, मंजूनाथ भजंत्री, राकेश रंजन सहित न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ, पीएलवी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।









