रांची: झारखंड की सियासत में एक बार फिर टेंडर, ट्रांसफर और बिचौलियों का मुद्दा गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Babulal Marandi ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को एक तीखा पत्र लिखकर ग्रामीण कार्य विभाग में कथित “टेंडर माफिया” और बाहरी दबाव तंत्र पर बड़ा हमला बोला है।
मरांडी ने दावा किया है कि ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के सहायक और कार्यपालक अभियंताओं ने संयुक्त हस्ताक्षर कर गंभीर शिकायत भेजी है, जिसमें साफ कहा गया है कि विभागीय कामकाज, खासकर टेंडर प्रक्रिया के दौरान उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है।
क्या हैं आरोप?
नेता प्रतिपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के मुताबिक—
▫️ रांची के अशोक नगर निवासी बब्बू मिश्रा पर अधिकारियों को लगातार फोन कर विशेष निविदाकारों को फायदा पहुंचाने के लिए दबाव बनाने का आरोप।
▫️ अधिकारियों के साथ गाली-गलौज और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप।
▫️ आदेश नहीं मानने पर ट्रांसफर और नौकरी खत्म कराने जैसी धमकियों का दावा।
▫️ हालात इतने गंभीर बताए गए कि अभियंताओं ने सुरक्षा नहीं मिलने पर कार्य बहिष्कार तक की चेतावनी दे दी।
मरांडी का सरकार पर बड़ा हमला.
मरांडी ने पत्र में सवाल उठाया कि अगर राज्य के इंजीनियर और अधिकारी ही भय के माहौल में काम करेंगे, तो विकास योजनाओं में पारदर्शिता कैसे बचेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि “बिचौलियों का आतंक प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बना रहा है और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिल रहा है।”
मरांडी ने मुख्यमंत्री से चार बड़ी मांगें रखीं हैं—
▫️ नामित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज हो।
▫️ अभियंताओं को सुरक्षा और प्रशासनिक संरक्षण दिया जाए।
▫️ टेंडर प्रक्रिया में दखल देने वाले बिचौलियों की पहचान कर कार्रवाई हो।
▫️ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को बेनकाब किया जाए।
अब बड़ा सवाल…
झारखंड में क्या सरकारी टेंडर सिस्टम पर बाहरी दबाव हावी है? क्या इंजीनियरों को सचमुच काम बहिष्कार की नौबत आ गई है? विपक्ष के इस विस्फोटक आरोप के बाद अब सबकी नजर Government of Jharkhand की प्रतिक्रिया पर टिक गई है।
यह मामला आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में बड़ा तूफान ला सकता है।










