लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी संगठनात्मक रणनीति को तेज करते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी की सहमति से प्रदेश सरकार ने राज्य के 761 नगरीय निकायों में 2802 पार्षदों का मनोनयन किया है। इसे कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इस मनोनयन के जरिए बीजेपी ने लंबे समय से जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को संगठन में सक्रिय भूमिका दी है। पार्टी इसे “बूस्टर डोज” के रूप में देख रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। साथ ही, पार्टी ने बोर्ड, आयोग, निगमों और एडवाइजरी कमेटियों की सूची को भी लगभग अंतिम रूप दे दिया है, जबकि जिला स्तर पर कमेटियों का गठन जारी है। प्रदेश की नई संगठनात्मक टीम भी जल्द घोषित होने की संभावना है।

राजनीतिक दृष्टि से यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी ने इस मनोनयन के जरिए जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है और विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ की काट तैयार करने का प्रयास किया है। मनोनीत पार्षदों में सभी वर्गों, जातियों और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे सामाजिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
समायोजन योजना के तहत नगर निगमों में 10-10, नगर पालिका परिषदों में 5-5 और नगर पंचायतों में 3-3 पार्षद मनोनीत किए गए हैं। इनका चयन सामाजिक कार्य और विशेष योग्यता के आधार पर किया गया है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर प्रभावी भूमिका निभा सकें।
बीजेपी का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर उन्हें मैदान में उतारना है। ये मनोनीत पार्षद न केवल स्थानीय मुद्दों को संभालेंगे, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाने और चुनावी तैयारियों को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई पार्टी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।











