नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान हुई हिंसा और मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत (CJI) ने इस घटना को अदालत के अधिकार क्षेत्र को "खुली चुनौती" और एक "दुस्साहसी कोशिश" करार दिया।
"अदालत को खुली चुनौती देने की कोशिश" - CJI
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना कोई सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:
"कल की घटना इस अदालत के अधिकार को खुली चुनौती देने की एक दुस्साहसी कोशिश थी। यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और पूरी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए किया गया था। हमें नहीं पता कि ये उपद्रवी कौन हैं, लेकिन आप (राज्य सरकार) हमें कड़ी टिप्पणी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।"
अधिकारियों के आचरण पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने न केवल राज्य सरकार को फटकारा, बल्कि पश्चिम बंगाल के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और गृह सचिव का आचरण निंदनीय है। कोर्ट ने संकेत दिया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला? (मालदा की घटना)
रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मालदा के एक गांव में SIR (विशेष गहन संशोधन) के कार्य में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। अधिकारियों को शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बंधक बनाकर रखा गया और उन्हें वहां से जाने नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक समाचार पत्र की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।
"आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक बयान देता है"
सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार का पक्ष रखा जा रहा था, तब CJI और भी नाराज हो गए। उन्होंने राज्य के एडवोकेट जनरल की मौजूदगी में कहा, "दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक रूप से बोलता है।" कोर्ट ने साफ किया कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट रूम की बड़ी बातें:
- कपिल सिब्बल (वरिष्ठ वकील): उन्होंने 'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- CJI सूर्यकांत: "हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। शाम 5 बजे घेराव शुरू हुआ और रात 11 बजे तक वहां स्थिति संभालने वाला कोई नहीं था।"
- मेनका गुरुस्वामी (वरिष्ठ वकील): उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले से जुड़े अधिकांश अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीर माना है और राज्य प्रशासन से जवाब तलब किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और अदालत की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।











