नई दिल्ली/रांची: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और रांची पुलिस के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी में अब सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है, जिसमें ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की सीबीआई जांच रोकने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले की तहकीकात केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा ही की जाएगी।
विवाद की जड़: पेयजल घोटाला और मारपीट का आरोप
इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत झारखंड के चर्चित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले से हुई थी। इस घोटाले के मुख्य अभियुक्त संतोष कुमार को जब ईडी ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, तो उसने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया है। संतोष कुमार की शिकायत पर रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके तुरंत बाद रांची पुलिस ने भारी दलबल के साथ ईडी के जोनल कार्यालय को घेर लिया था, जिसे केंद्रीय एजेंसी ने अपनी जांच प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करार दिया था।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
ईडी ने पुलिस की इस कार्रवाई और अभियुक्त द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि राज्य पुलिस की कार्रवाई में पूर्वाग्रह की संभावना हो सकती है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 13 अप्रैल को होने वाली सुनवाई टलने के बाद आज हुई अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की दलीलों को खारिज कर हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
क्या होगा इस फैसले का असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब झारखंड सरकार और रांची पुलिस के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है। सीबीआई अब इस बात की जांच करेगी कि क्या वास्तव में ईडी अधिकारियों ने अभियुक्त संतोष कुमार के साथ मारपीट की थी या फिर यह जांच एजेंसी पर दबाव बनाने और घोटाले की जांच को भटकाने की एक सुनियोजित साजिश थी। यह फैसला भविष्य में केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच होने वाले क्षेत्राधिकार के विवादों के लिए भी एक नजीर साबित होगा। फिलहाल, इस आदेश से ईडी को बड़ी राहत मिली है और एजेंसी अब बिना किसी स्थानीय बाधा के भ्रष्टाचार के मामलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगी।










