नई दिल्ली।
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश को गुरुवार, 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा झटका लगा। एक्स-पोस्ट फैक्टो पर्यावरणीय मंजूरी (Ex-Post Facto Environmental Clearance) के खिलाफ दायर उनकी रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसके बाद जयराम रमेश की ओर से याचिका वापस ले ली गई।
किस मामले में दायर की गई थी याचिका?
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
इस कार्यालय ज्ञापन के तहत पर्यावरण संबंधी परियोजनाओं को पूर्वव्यापी (Ex-Post Facto) पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले को लागू करने का प्रावधान किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या सवाल उठाए?
इस मामले की सुनवाई CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई।
याचिका पर प्रारंभिक टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने तीखा सवाल पूछा—
“जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही ‘वनशक्ति रिव्यू जजमेंट’ में एक्स-पोस्ट फैक्टो EC से संबंधित यूनियन के ऑफिस मेमोरेंडम को मंजूरी दे चुका है, तो इस फैसले को चुनौती देने के लिए रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है?”
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिस कार्यालय ज्ञापन को चुनौती दी गई है, वह सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले को लागू करने के लिए जारी किया गया है।
CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने जयराम रमेश पर नाराजगी जताते हुए कड़े शब्दों में कहा—
“आप इसकी भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें। हम इसके पीछे की साजिश जानते हैं।”
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि—
- क्या किसी न्यायिक फैसले को रिट याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है?
- यह याचिका कानूनी से अधिक मीडिया केंद्रित प्रतीत होती है
- कोर्ट ने याचिका पर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी
जुर्माने की चेतावनी के बाद याचिका वापस
जब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जुर्माने की संभावना जताई, तब कांग्रेस सांसद जयराम रमेश की ओर से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
इसके बाद इस मामले में कोई विस्तृत सुनवाई नहीं हुई।
क्या है ‘वनशक्ति रिव्यू जजमेंट’?
सुप्रीम कोर्ट के वनशक्ति रिव्यू जजमेंट में कुछ विशेष परिस्थितियों में एक्स-पोस्ट फैक्टो पर्यावरणीय मंजूरी को वैध ठहराया गया था।
केंद्र सरकार ने इसी फैसले को लागू करने के लिए संबंधित कार्यालय ज्ञापन जारी किया था, जिसे जयराम रमेश ने चुनौती दी थी।
राजनीतिक और कानूनी मायने
- यह मामला पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन से जुड़ा है
- सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से यह संकेत मिला है कि पहले से तय न्यायिक फैसलों को चुनौती देने पर अदालत कड़ा रुख अपना सकती है
- साथ ही कोर्ट ने राजनीतिक उद्देश्यों से याचिका दायर करने के संकेत पर भी नाराजगी जताई











