कानपुर। कानपुर के बहुचर्चित लैंबोर्गिनी हिट एंड रन मामले में आखिरकार पुलिस ने 96 घंटे बाद तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद शिवम का मेडिकल परीक्षण कराया गया और अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
यह मामला तब और ज्यादा चर्चा में आ गया, जब आरोपी शिवम मिश्रा को बचाने के लिए परिवार और वकीलों की ओर से लगातार अलग-अलग दावे किए गए। पहले कहा गया कि एक्सीडेंट फीटस आने की वजह से हुआ, फिर यह तर्क दिया गया कि शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था। इसके बाद बचाव पक्ष की ओर से एक ड्राइवर मोहन को कोर्ट में पेश किया गया।
हालांकि, पुलिस ने साफ किया कि लैंबोर्गिनी कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था और ड्राइवर मोहन के नाम से कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में भी शिवम को गाड़ी चलाते हुए स्पष्ट देखा गया है। इसी आधार पर कोर्ट ने ड्राइवर मोहन के हलफनामे को खारिज कर दिया।
सरेंडर करता तो मिल जाती जमानत!
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर शिवम मिश्रा ने एक्सीडेंट के तुरंत बाद सरेंडर कर दिया होता, तो दो घंटे के भीतर ही थाने से जमानत मिल सकती थी। दरअसल, हिट एंड रन के मामलों में यदि किसी की मौत नहीं होती, तो तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं होता। इस अपराध में 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
लेकिन, जिस तरह से परिवार ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और मामले को उलझाया, उससे पुलिस अब सख्त रुख अपनाए हुए है। माना जा रहा है कि आगे की कार्रवाई में चार्जशीट अहम भूमिका निभाएगी।
घायलों ने की कार्रवाई न करने की अपील
इस मामले में घायल हुए लोगों ने भी कोर्ट में एफिडेविट देकर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई न करने की बात कही है। इसके बावजूद मामला सुर्खियों में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
पुलिस का बयान
डीसीपी कानपुर सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि शिवम मिश्रा को कोर्ट में पेश किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जाएगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में शिवम मिश्रा को न्यायिक हिरासत में भेजती है या राहत देती है।











