राज्य सरकार ने सचिवालय सेवा संवर्ग की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा इसके पुनर्गठन की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजस्व पर्षद के वरिष्ठ सदस्य मस्त राम मीणा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। कार्मिक विभाग द्वारा 23 अप्रैल की शाम को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस कमेटी में प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देते हुए कार्मिक, वित्त और भू-राजस्व सचिवों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जो सचिवालय सेवा के विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करेंगे।
गठित कमेटी को सचिवालय सेवा के पदों की कार्य विशिष्टता, वर्तमान में स्वीकृत पदों की संख्या और भविष्य में होने वाली कार्य वृद्धि का गहन आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमेटी न केवल प्रशाखाओं के पुनर्गठन और पदोन्नति के लिए आवश्यक समय सीमा (कालावधि) पर अपनी अनुशंसा देगी, बल्कि सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) के रिक्त पदों पर सीधी नियुक्ति के संदर्भ में भी राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव उपलब्ध कराएगी। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध रखते हुए कमेटी को आगामी तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
दूसरी ओर, इस निर्णय के बाद सचिवालय सेवा संघ ने कमेटी के स्वरूप को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। संघ की प्रमुख मांग है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर इस कैडर रिव्यू कमेटी में सचिवालय सेवा के कम से कम एक प्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। संघ का तर्क है कि संवर्ग से जुड़ा सदस्य होने पर ही तथ्यात्मक और जमीनी विषयों को प्रभावी ढंग से कमेटी के समक्ष रखा जा सकेगा। सचिवालय सेवा संघ को यह आशंका है कि प्रतिनिधि के अभाव में लिए गए निर्णय एकतरफा हो सकते हैं, जिससे कर्मचारियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विवाद का एक मुख्य केंद्र पूर्व में कार्मिक विभाग द्वारा प्रस्तावित पुनर्गठन का ढांचा भी है। पूर्ववर्ती प्रस्ताव में एएसओ के तीन पदों के बदले एक अनुभाग पदाधिकारी (एसओ) का पद सृजित करने की बात कही गई थी, जबकि कर्मचारी संघ लगातार केंद्र सरकार के अनुरूप दो अनुपात एक (2:1) की वर्तमान व्यवस्था को ही बरकरार रखने पर जोर दे रहा है। ऐसे में यह कमेटी न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि कर्मचारियों और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।








