रांची: झारखंड की राजधानी के हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम, खेलगांव में 'मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह-सह-मुखिया सम्मेलन 2026' का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ग्रामीण सशक्तिकरण और पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य के विकास की असली नींव गांवों में ही निहित है और जब तक ग्रामीण क्षेत्र मजबूत नहीं होंगे, तब तक समृद्ध राज्य की कल्पना अधूरी है।


उत्कृष्ट पंचायतों और जनप्रतिनिधियों का सम्मान
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों, श्रेष्ठ ग्राम सभाओं, स्वच्छ एवं स्वस्थ पंचायत समितियों और जिला परिषदों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना के तहत इन निकायों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। हेमंत सोरेन ने कहा कि अच्छे कार्यों की पहचान करना और उन्हें सम्मानित करना एक आवश्यक पहल है, ताकि अन्य पंचायतों में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जगे और वे नवाचार की दिशा में आगे बढ़ें।


अब पंचायतों में ही बनेंगे आधार कार्ड
इस कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के साथ हस्ताक्षरित 'सहभागिता की शर्तों' (MoU) का औपचारिक हस्तांतरण रहा। इस समझौते के माध्यम से अब ग्रामीणों को आधार कार्ड से संबंधित कार्यों के लिए दूर-दराज के शहरों या केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ग्राम पंचायतों के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से यह सुविधा अब गांव स्तर पर ही उपलब्ध होगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

जल संरक्षण और सोलर पावर से आत्मनिर्भरता का मंत्र
आगामी गर्मी के मौसम और संभावित जल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने तालाबों की सफाई और गहरीकरण का कार्य प्राथमिकता पर किया जाए ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। इसके साथ ही भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए चापाकलों के समीप सोक पिट (Sok Pit) निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही।
ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक नई दिशा दिखाते हुए कहा कि खेतों का उपयोग केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहे। उन्होंने ग्रामीणों को खाली या बंजर भूमि पर सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया। इस प्लांट से उत्पादित बिजली को सरकार खरीदेगी, जिससे ग्रामीणों के लिए आय का एक नया और स्थायी स्रोत सृजित होगा।

ग्रामीणों के सबसे करीब हैं जनप्रतिनिधि
प्रशासनिक ढांचे और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर चर्चा करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि मुखिया और अन्य पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीणों के सबसे करीब रहते हैं। वे सरकार की योजनाओं और जनता की अपेक्षाओं के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार मुख्यालय या राजधानी से नहीं, बल्कि सीधे गांवों से संचालित होने वाली सरकार है। यही कारण है कि अब पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों से पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से झारखंड के गांव विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेंगे।
इस अवसर पर राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायकगण, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।










