उत्तर प्रदेश के इटावा सफारी पार्क में जन्मे पहले शेर सिंबा और सुल्तान अब अपने जीवन के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां उनके कुनबे को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी गई है। सफारी प्रबंधन इन दोनों शेरों के लिए उपयुक्त शेरनियों की तलाश में जुटा हुआ है, ताकि यहां एशियाई शेरों की संख्या में वृद्धि की जा सके और पार्क की पहचान और मजबूत हो।
करीब साढ़े नौ साल के हो चुके सिंबा और सुल्तान, सफारी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। इनका जन्म अक्टूबर 2016 में बब्बर शेर मनन और जेसिका के मेल से हुआ था। हालांकि, सफारी में मौजूद अन्य मादा शेरनियां इनकी सिबलिंग हैं, जिसके चलते उनके साथ प्रजनन संभव नहीं है। यही वजह है कि अब बाहर से नई शेरनी लाने की योजना बनाई गई है।
इसी क्रम में हरियाणा के रोहतक प्राणि उद्यान से ‘सुधा’ नाम की शेरनी को इटावा लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि इसके लिए दोनों पक्षों के बीच सहमति बन रही है। प्रस्ताव के तहत इटावा सफारी से वर्ष 2022 में विश्व लायन डे पर जन्मे नर शेर ‘विश्वा’ को रोहतक भेजा जाएगा, जबकि वहां से शेरनी सुधा को इटावा लाया जाएगा।
शेरनी सुधा पहले दो बार मां बन चुकी है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह इटावा सफारी में भी सफल प्रजनन कर सकेगी। हालांकि, उसे लाने से पहले उसके स्वास्थ्य की पूरी जांच कराई जाएगी। इसके लिए उसके सैंपल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) भेजे जाएंगे।
सफारी प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल सिंबा और सुल्तान की जोड़ी बनेगी, बल्कि आने वाले समय में एशियाई शेरों की नई पीढ़ी भी यहां देखने को मिलेगी, जिससे इटावा सफारी पार्क की लोकप्रियता और बढ़ेगी।











