दिल्ली-एनसीआर के परिवहन ढांचे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है क्योंकि रेल मंत्रालय और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बोड़ाकी को नई दिल्ली और आनंद विहार टर्मिनल के एक बड़े विकल्प के रूप में विकसित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अब पहले से कहीं अधिक जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र उत्तर भारत का एक प्रमुख ट्रांजिट हब बनकर उभरेगा। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस प्रोजेक्ट के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया गया है। पहले यहां केवल 39 एकड़ जमीन पर यात्री सुविधाओं का विस्तार होना था, लेकिन भविष्य की जरूरतों और आनंद विहार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब इसमें 99 एकड़ का इजाफा किया गया है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के अनुसार, अब इस पूरे टर्मिनल परिसर के लिए कुल 138 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। संशोधित योजना के तहत यहां यात्रियों के लिए 13 प्लेटफॉर्म और लगभग 63 यार्ड लाइनें बनाई जाएंगी। यह ढांचा इतना विशाल होगा कि यहां से वंदे भारत, राजधानी और अन्य सुपरफास्ट एक्सप्रेस सहित 100 से अधिक ट्रेनें संचालित हो सकेंगी। इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्राधिकरण ने आसपास के सात प्रमुख गांवों में जमीन खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी है। रेल संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 20ए के तहत चमरावली, बोड़ाकी, दादरी, तिलपता करनवास, पाली, पल्ला और चमरावली रामगढ़ गांवों की जमीन अधिगृहीत की जाएगी। इस अधिग्रहण से लगभग एक हजार से अधिक किसान प्रभावित होंगे। प्राधिकरण प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की नई दरें तय कर रहा है। साथ ही, किसानों को विकसित सेक्टरों में 6 प्रतिशत भूखंड (प्लाट) देने का विकल्प भी दिया जाएगा और किसानों को जमीन के बदले जमीन देने के लिए प्राधिकरण अलग से करीब 250 एकड़ जमीन खरीदेगा।
बोड़ाकी केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं होगा, बल्कि यह एक इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब (MMTH) होगा जहां यात्रियों को एक ही परिसर में तीन तरह की परिवहन सुविधाएं मिलेंगी। इसमें 13 प्लेटफॉर्म के साथ रेलवे टर्मिनल, पड़ोसी राज्यों के लिए इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) और नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की एक्वा लाइन के डिपो स्टेशन से बोड़ाकी तक मेट्रो का विस्तार शामिल है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के शुरू होने से इस क्षेत्र में यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आने की उम्मीद है, इसलिए बोड़ाकी टर्मिनल को जेवर एयरपोर्ट और यमुना सिटी से सीधे जोड़ने की योजना है। इससे गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं होगी।
साथ ही, यहां विकसित हो रहे मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के फेज-2 के तहत भारी निवेश की तैयारी है। फेज-1 के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले से जारी है, जिसमें करीब 358 एकड़ में 1700 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। रेलवे चेयरमैन के सुझाव के अनुसार, भविष्य में आनंद विहार टर्मिनल के पास नई ट्रेनों या अतिरिक्त संसाधनों के लिए जगह नहीं बचेगी, ऐसे में बोड़ाकी एक सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में दिल्ली के स्टेशनों का बोझ कम करेगा। 105 मीटर चौड़ी सड़क का विस्तार और लॉजिस्टिक हब के साथ जुड़ने से यह इलाका आने वाले समय में उत्तर भारत के सबसे बड़े कमर्शियल और ट्रांसपोर्ट सेंटर के रूप में पहचाना जाएगा।











