आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी से बगावत का बिगुल फूंक दिया है। चड्ढा ने दावा किया है कि उनके साथ आम आदमी पार्टी के कुल 7 सांसद हैं जिन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच पर राघव चड्ढा के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण सांसद, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे, जो पार्टी में आए इस बड़े बिखराव की पुष्टि कर रहे थे।
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की घोषणा करते हुए बेहद भावुक और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जिस आम आदमी पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपने जीवन के बेशकीमती 15 साल दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों से पूरी तरह भटक गई है। चड्ढा के अनुसार, पार्टी अब राष्ट्रहित को ताक पर रखकर निजी फायदों के लिए काम कर रही है। उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें लगातार ऐसा महसूस हो रहा था कि वह एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति बनकर रह गए हैं। इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने अब आम आदमी पार्टी से अलग होकर जनता के बीच जाने का फैसला किया है।
इस राजनीतिक उलटफेर में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दल-बदल और विलय का है। संदीप पाठक और अशोक मित्तल की मौजूदगी में राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों ने एक साथ आने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि वे भारत के संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अपने गुट का विलय करेंगे। चड्ढा ने उन सांसदों के नामों का भी खुलासा किया जो इस विद्रोह में उनके साथ हैं। उनके मुताबिक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल भी इस फैसले में उनके साथ खड़े हैं, जिससे पार्टी के संसदीय दल में भारी टूट सुनिश्चित हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद संदीप पाठक ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा खुद से ऊपर पार्टी और अरविंद केजरीवाल को रखा। उन्होंने देश के लाखों कार्यकर्ताओं की भावनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं ने निस्वार्थ भाव से पार्टी को आगे बढ़ाया, लेकिन अंततः पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई। इस बगावत ने न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदल कर रख दिया है। चड्ढा और उनके साथियों का यह कदम दिल्ली और पंजाब की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।











