लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी 30 अप्रैल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है क्योंकि योगी सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किया है। इस सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार का मुख्य फोकस प्रदेश की 'आधी आबादी' यानी महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर रहेगा। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े घटनाक्रमों के बाद उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर सियासी सरगर्मी तेज है और माना जा रहा है कि यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का केंद्र बनेगा।
सत्र के दौरान सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर एक विस्तृत रूपरेखा पेश करेगी, जिसमें महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही कार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उच्च शिक्षा के अवसरों को उन तक सुलभ बनाने और राजनीति सहित समाज के निर्णय लेने वाले महत्वपूर्ण पदों पर उनकी उपस्थिति दर्ज कराने जैसे विषयों पर सदन में संवाद होगा। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इसे महिला कल्याण की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष के तेवरों को देखते हुए सत्र के काफी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
महिला केंद्रित चर्चाओं के अतिरिक्त, इस विशेष सत्र में योगी सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को भी अंजाम देगी। सदन की मेज पर विभिन्न अध्यादेशों की अधिसूचनाएं और नियम रखे जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण संशोधन अध्यादेश 2026 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 शामिल हैं। साथ ही, शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े उत्तर प्रदेश वानिकी और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश 2026 और उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का समन और विचारण) अध्यादेश 2026 को भी पटल पर रखा जाएगा। इन विधेयकों और अध्यादेशों के जरिए सरकार प्रदेश के प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे में बड़े बदलावों की तैयारी में है।











