लेख - श्री संजय पाण्डेय,ज्योतिषाचार्य, संपर्क करे - (9504415807)
कुंडली में बहुत से दोष देखे जाते हैं, पर आज हम राहु से बनने वाले सबसे खराब और भयंकर दोष की बात कर रहे हैं।
राहु से बनने वाले कुछ दोष या योग इस प्रकार हैं —
- राहु + गुरु : गुरु चांडाल दोष
- राहु + मंगल : अंगारक दोष
- राहु + चंद्र : ग्रहण दोष
- राहु + सूर्य : ग्रहण दोष
- राहु और केतु के बीच जब सभी ग्रह 80 डिग्री के भीतर आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष बनता है।
गुरु चांडाल दोष (राहु + गुरु)
अब समझते हैं इसके लक्षण और प्रभाव के बारे में।
जब गुरु और राहु कुंडली के किसी भाव में एक साथ बैठ जाते हैं, तब इस दोष का निर्माण होता है, जिसे गुरु चांडाल दोष कहते हैं।
इसके लक्षण —
किसी भी जातक की कुंडली में, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, यदि गुरु चांडाल दोष का योग बनता है तो —
- पति-पत्नी के बीच दूरी बनती है
- विवाहित दंपत्ति के बीच अत्यधिक विचार-मतभेद होते हैं और हिंसात्मक माहौल भी बन जाता है
- शिक्षा ग्रहण करने में बाधा उत्पन्न होती है
- नौकरी प्राप्त करने में परेशानी होती है
- पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता, नशे की आदत भी हो सकती है
- माता-पिता से दूरी बन जाती है
अंगारक दोष (राहु + मंगल)
किसी जातक की कुंडली में राहु और मंगल की युति एक साथ होने पर अंगारक दोष बनता है।
इसके लक्षण और प्रभाव —
- शरीर का कोई भी अंग कट जाना
- हाथ या पैर की किसी एक उंगली का न होना
- किसी घातक हथियार या बारूद से जल जाना
- डॉक्टर की सलाह पर शरीर का कोई अंग अलग करवाना पड़ना
अर्थात इस दोष में ऐसा देखा गया है कि शरीर का कोई न कोई भाग निश्चित रूप से छिन्न-भिन्न हो जाता है।
इस दोष में राहु और मंगल की विस्फोटक स्थिति बनती है, जिसके कारण शरीर का कोई भाग डॉक्टर की सलाह पर अलग करना पड़ता है।
ग्रहण दोष (राहु + सूर्य)
जब राहु और सूर्य किसी जातक की कुंडली में एक साथ बैठ जाते हैं, तब इस दोष का निर्माण होता है।
इसके लक्षण —
- विद्या अध्ययन में अत्यधिक कमी
- माता-पिता से अपमानित होना
- सरकारी कार्य या बड़ी सरकारी नौकरी में बहुत परेशानी
- बार-बार कर्ज लेने की स्थिति बनना
- पिता से संबंध कमजोर रहना
- जीवन की तरक्की में बार-बार रुकावट आना
🌙 ग्रहण दोष (राहु + चंद्र)
जब कुंडली में राहु और चंद्र एक साथ होते हैं, तब यह दोष बनता है।
इसके लक्षण और प्रभाव —
- मानसिक रूप से अत्यधिक परेशानी
- जातक का व्यवहार पागल जैसा हो जाना
- समाज में बहुत अधिक अपमान
- अत्यधिक नशे की आदत लग जाना
- घर में माता को बहुत अधिक कष्ट
- घर में मन न लगना और हमेशा बाहर रहने की आदत
कालसर्प दोष
कुंडली में गुरु चांडाल दोष के बाद सबसे खराब और खतरनाक दोष कालसर्प दोष माना जाता है।
इसके लक्षण और प्रभाव —
- हर कार्य में बाधा
- आर्थिक रूप से अत्यधिक परेशानी
- बार-बार दुर्घटनाएं होना
- घर में बेवजह क्लेश का वातावरण
- घर में किसी न किसी का बीमार रहना या अचानक बड़ी बीमारी का पता चलना
- सांप से खतरा बना रहना
- डरावने सपने आना
- बार-बार पितरों का सपना आना
- अंधेरे से डर लगना और नींद न आना
उपाय
राहु से बने हुए दोषों से मुक्ति के लिए —
घर में या शिवालय में भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक,
भागवत कथा का पाठ करने से या करवाने से लाभ मिलता है और इसके दुष्परिणाम काफी कम हो जाते हैं।
क्योंकि राहु एक छाया ग्रह है, पर इसका असर बहुत भयंकर देखा जाता है।
नोटिस
आपकी कुंडली में राहु से बना कौन-सा दोष है, इसका सही परीक्षण किसी अच्छे और अनुभवी ज्योतिषी से करवाकर ही इन उपायों का प्रयोग करें।










