लेख - श्री संजय पाण्डेय,ज्योतिषाचार्य, संपर्क करे - (9504415807)
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और विशेष माना गया है। यह तिथि सृष्टि के पालनहार और जगतगुरु भगवान श्री विष्णु को समर्पित है।
एकादशी की उत्पत्ति और पौराणिक कथा
पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ था, जिनका नाम 'एकादशी' था। असुरों का वध करने और धर्म की रक्षा के लिए इन देवी की पूजा की जाती थी । पुराणों में वर्णित है कि ये देवी मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। सामान्य मनुष्य के भीतर जो मानसिक विकार या 'मन के राक्षस' होते हैं, उनका दमन करने के लिए एकादशी का व्रत और पूजन अत्यंत लाभकारी होता है।
कामना पूर्ति और मोक्ष का मार्ग
एकादशी देवी न केवल मोक्ष देती हैं, बल्कि भक्तों की हर सात्विक कामना को भी पूर्ण करती हैं। इसीलिए हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों पर भगवान विष्णु की सेवा और आराधना की जाती है। धरती पर ज्ञानी, तपस्वी, योगी, साधु-संत और सामान्य मनुष्य इस तिथि को उपवास रखते हैं और अगले दिन विधि-विधान से पारण करते हैं।
वर्ष की 24 एकादशी
एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं (प्रत्येक माह में दो)।
- शुक्ल पक्ष की एकादशी
- कृष्ण पक्ष की एकादशी
इन सभी के अलग-अलग नाम और महत्व हैं, जैसे:
- भीम एकादशी
- मोहिनी एकादशी
- निर्जला एकादशी
- पापमोचिनी एकादशी (इसी प्रकार कुल 24 नाम हैं)।
एकादशी व्रत का फल
मान्यता है कि एकादशी तिथि पर किए गए दान, पुण्य और पूजा का फल 100 गुना अधिक मिलता है। यदि आपकी श्रद्धा, विश्वास और कामना शुद्ध है, तो पूरे नियम और सद्भाव से किया गया मंत्र जाप आपकी मनोकामना को एक वर्ष के भीतर निश्चित रूप से पूर्ण करता है।
विशेष सूचना: पुत्रदा एकादशी (30 दिसंबर)
आगामी 30 दिसंबर 2025 को 'पुत्रदा एकादशी' है। यह एकादशी मुख्य रूप से निसंतान दंपत्तियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं।
- तिथि प्रारंभ: 30 दिसंबर 2025, सुबह 07:55 बजे से।
- पारण का समय: 31 दिसंबर 2025, सुबह (शुभ मुहूर्त के अनुसार)।
नोट: व्रत के दौरान मन में शुद्ध विचार रखें और पूरी आस्था के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करें।










