जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने एक रणनीतिक फैसले के तहत विदेशी नागरिक क्रिस्टोफ श्नेलमान की जगह भारतीय नागरिक नीतू समरा को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त कर दिया है। इस बदलाव के साथ ही पिछले काफी समय से सुरक्षा मंजूरी को लेकर फंसा हुआ पेच अब सुलझ गया है।
सुरक्षा नियमों के चलते रुकी थी प्रक्रिया
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा 28 मार्च को किया जा चुका है और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से इसे 6 मार्च को ही एरोड्रम लाइसेंस मिल गया था। हालांकि, उड़ानों की शुरुआत में सबसे बड़ी बाधा ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के नियम थे। नियमों के मुताबिक, किसी भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के CEO का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है, क्योंकि यह पद हवाई अड्डे की सुरक्षा और संवेदनशीलता से सीधे तौर पर जुड़ा होता है।
इससे पहले गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस नियम में ढील देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। विदेशी CEO होने के कारण एयरपोर्ट को जरूरी सुरक्षा क्लीयरेंस नहीं मिल पा रहा था, जिससे कमर्शियल ऑपरेशंस की तारीख लगातार आगे बढ़ रही थी।
नीतू समरा की नियुक्ति से मिली रफ्तार
संकट को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से अपनी मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नीतू समरा को अंतरिम CEO की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके भारतीय नागरिक होने के नाते अब BCAS से सुरक्षा मंजूरी और एरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम के अप्रूवल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स जल्द ही स्थायी CEO की नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी कर लेंगे। प्रबंधन अब सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने की अंतिम समय-सीमा तय करने में जुट गया है।
अगले माह से उड़ान भरने की तैयारी
विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस प्रशासनिक सुधार के बाद मई के अंत या जून के पहले सप्ताह तक जेवर एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट उड़ान भर सकती है। शुरुआत में यहाँ से देश के 17 प्रमुख शहरों के लिए हवाई सेवा उपलब्ध होगी। पहले चरण में प्रतिदिन 60 से 65 उड़ानें संचालित करने की योजना है।
जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव काफी कम हो जाएगा। पहले चरण में इस एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अब उन्हें हवाई यात्रा के लिए दिल्ली जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। प्रबंधन को उम्मीद है कि आगामी कुछ हफ्तों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।











