नोएडा (उत्तर प्रदेश): दिल्ली से सटे औद्योगिक केंद्र नोएडा की वर्क-कल्चर में 1 मई 2026 से एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। नोएडा की औद्योगिक इकाइयों ने अब अपने यहाँ 'टू-शिफ्ट' सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। यह फैसला मुख्य रूप से हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन और उसके बाद हाईपावर कमेटी द्वारा वेतन वृद्धि और ओवरटाइम के नियमों में किए गए बदलावों के मद्देनजर लिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से सालों से चली आ रही 'ओवरटाइम' की परंपरा अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
आंदोलन से बदलाव तक का सफर
इस बड़े बदलाव की जड़ें 13 अप्रैल 2026 को हुए उस श्रमिक प्रदर्शन में छिपी हैं, जिसमें नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में काम करने वाले हजारों मजदूरों ने वेतन वृद्धि और ओवरटाइम के लिए 'डबल भुगतान' की मांग की थी। कुछ स्थानों पर यह आंदोलन उग्र भी हो गया था, जिसके बाद प्रशासन ने एक हाईपावर कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने न केवल न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) बढ़ाने की सिफारिश की, बल्कि श्रम कानूनों के तहत ओवरटाइम का डबल पैसा देना भी अनिवार्य कर दिया।
उद्यमियों का मानना है कि वेतन वृद्धि और डबल ओवरटाइम का खर्च उठाने से उत्पादन की लागत (Input Cost) काफी बढ़ जाएगी। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (NEA) और अन्य औद्योगिक संगठनों ने तय किया है कि वे अब श्रमिकों से अतिरिक्त समय काम कराने के बजाय एक पूरी नई शिफ्ट शुरू करेंगे।
शिफ्ट का समय और नई कार्ययोजना
1 मई से लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत फैक्ट्रियों में काम दो चरणों में विभाजित होगा। पहली शिफ्ट सुबह 6:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:00 बजे शुरू होकर रात 10:00 बजे समाप्त होगी। इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि अब किसी भी श्रमिक के पास ओवरटाइम करने का विकल्प नहीं होगा। उद्यमियों ने स्पष्ट किया है कि वे अब अतिरिक्त काम के लिए 4 घंटे का ओवरटाइम देने के बजाय, 8 घंटे की नई शिफ्ट के लिए नए कर्मचारियों की भर्ती करेंगे।
नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार, भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए उत्पादों की कीमत कम रखना जरूरी है। यदि मजदूरी की लागत अनियंत्रित बढ़ती है, तो उत्पाद महंगे हो जाएंगे। इसलिए कॉस्ट बैलेंस करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कई कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया शुरू भी कर दी है और 24 अप्रैल को उद्यमी इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने लखनऊ भी जा रहे हैं।
16 घंटे उत्पादन और संसाधनों का प्रबंधन
नई योजना के तहत फैक्ट्रियां अब दिन में कम से कम 16 घंटे क्रियाशील रहेंगी। इसके लिए औद्योगिक इकाइयां बिजली की निर्बाध आपूर्ति और जनरेटर (DG सेट) की लागत का गहन आकलन कर रही हैं। कोशिश यह है कि काम के घंटों में विस्तार होने के बावजूद बिजली और अन्य संसाधनों का खर्च उत्पादन की मात्रा के अनुपात में ही रहे, ताकि अंतिम उत्पाद की कीमत पर इसका बोझ न पड़े।
फायदे और चुनौतियां: एक विश्लेषण
इस निर्णय के दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इसका सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि नोएडा में हजारों नए लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे, क्योंकि एक पूरी शिफ्ट के लिए मैनपावर की जरूरत पड़ेगी। इससे बेरोजगारी कम होगी और शिफ्ट बदलने से श्रमिकों के पास अपने परिवार के लिए भी पर्याप्त समय होगा।
हालांकि, इसका दूसरा पक्ष उन पुराने श्रमिकों के लिए चुनौतीपूर्ण है जो अब तक ओवरटाइम के जरिए अपनी आय बढ़ाते थे। अब उन्हें केवल तय वेतन पर ही निर्भर रहना होगा, जिससे उनके मासिक बजट पर असर पड़ सकता है। उद्यमियों का तर्क है कि यह व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से उद्योग और श्रमिक दोनों के लिए एक स्वस्थ वातावरण तैयार करेगी, जहाँ शारीरिक शोषण के बजाय तय घंटों में काम और अधिक लोगों को रोजगार की सुरक्षा मिलेगी।











