कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह पर कानून का शिकंजा और कसता जा रहा है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई समेत 20 आरोपियों के खिलाफ कड़े प्रावधानों के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत ने बिश्नोई और उसके साथियों के खिलाफ मकोका (MCOCA), आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया है।
दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इस मामले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, यह गिरोह एक संगठित अपराधी सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था। जांच में पाया गया कि आरोपी जेल की सलाखों के पीछे से ही अपना काला साम्राज्य चला रहे थे। इनका मुख्य उद्देश्य हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसे जघन्य अपराधों के जरिए आर्थिक लाभ कमाना था। अदालत ने माना है कि यह गिरोह समाज के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है और सुनियोजित तरीके से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
पुलिस के दावों ने गिरोह के हाई-टेक नेटवर्क की भी पोल खोल दी है। समय-समय पर जेलों में की गई छापेमारी के दौरान इन आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इन फोन का इस्तेमाल न केवल गिरोह के सदस्यों के बीच तालमेल बिठाने के लिए किया जा रहा था, बल्कि जेल से ही वारदातों की साजिश भी रची जा रही थी। इतना ही नहीं, पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हुए हैं और इसके सदस्य थाईलैंड, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से बैठकर भारत में अपनी आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। अब इन गंभीर आरोपों के तय होने के बाद लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह की कानूनी राह बेहद कठिन होने वाली है।










