लेख - श्री संजय पाण्डेय,ज्योतिषाचार्य, संपर्क करे - (9504415807)
आप जो ऊपर थंबनेल देख रहे हैं, उसमें 12 भाव (घर) दिख रहे हैं। उसमें 12 बॉक्स बने हैं जिसको ज्योतिष शास्त्र में 'भाव' कहते हैं, 'घर' भी कहते हैं और अंग्रेजी में इसे 'हाउस' (House) कहते हैं।
कुंडली के ये 12 भाव आपके भाग्य का आईना होते हैं। किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री या कुंडली विश्लेषण करने वाले ज्ञानी आपके इन 12 भावों को देखकर आपके जीवन की कहानी एक पन्ने पर उतारने का सामर्थ्य रखते हैं। आइये जानते हैं इन भावों का महत्व:
भावों का विस्तृत विश्लेषण:
- 1. प्रथम भाव (लग्न): प्रथम भाव आपका लग्न कहलाता है, जिसका मतलब होता है आप खुद। यह भाव आपके मन, विचार, आचरण और आपकी सोच को बताता है कि आप कैसे हैं, किस विचार के हैं और किस आचरण के हैं।
- 2. द्वितीय भाव: दूसरा भाव आपकी किस्मत, आपके पास के धन और संपत्ति के बारे में बताता है।
- 3. तृतीय भाव: तीसरा भाव आपके संसाधन के बारे में बताता है कि आपने जन्म लिया है तो आप किस प्रकार और किस संसाधन के माध्यम से अपने जीवन में धन अर्जित करेंगे या धन कमाएंगे।
- 4. चतुर्थ भाव: यह आपके माता के बारे में बताता है। साथ ही, माता-पिता द्वारा कमाया हुआ धन, प्रॉपर्टी का रखरखाव या फिर खुद से मेहनत करके कमाई हुई संपत्ति का उपयोग या भोग कर पाएंगे या नहीं, यह दर्शाता है।
- 5. पंचम भाव: यह संतान और शिक्षा का घर है। यह हमें सूचित करता है कि आपके माता-पिता के ज्ञान और उस घर के बच्चे के ज्ञान से समाज में कितना लाभ प्राप्त करेंगे और किस तरह की शिक्षा ग्रहण करके उसका उपयोग करेंगे। इसे देखकर ज्योतिष गण अभिभावक और बच्चे के शिक्षा व ज्ञान के बारे में पहले ही बता देते हैं।
- 6. षष्ठ भाव (छठा भाव): छठा भाव हमारे जीवन में शत्रु, रोग, कार्य और परेशानी को बताता है। इससे सूचना मिलती है कि शत्रु कैसे होंगे (परिवार में या समाज में), कोई गंभीर रोग होगा या कर्ज लेकर जीवन निर्वाह करना होगा।
- 7. सप्तम भाव: यह घर कुंडली में हमारे जीवनसाथी (पार्टनर), बिजनेस पार्टनर या जीवन के साथियों के बारे में दर्शाता है। खासकर यह पत्नी के बारे में फोकस करता है कि जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर से कितना लाभ या शुभ फल प्राप्त होगा।
- 8. अष्टम भाव: यह बहुत रहस्यमय भाव है। इससे जीवन और मृत्यु के बारे में जानकारी मिलती है। यह भाव बताता है कि मृत्यु कहां और कैसे होगी—दुर्घटना से, घातक हथियार से, खुदकुशी के द्वारा या स्वयं (स्वाभाविक) मृत्यु प्राप्त करेंगे।
- 9. नवम भाव: ज्योतिष गण इस भाव को देखकर आपकी किस्मत का लेखा-जोखा बताते हैं कि आप धरती पर क्या करने आए हैं। इस भाव से हमारी किस्मत की लकीर बनती है और देखा जाता है कि जीवन में धन, शोहरत, मान-सम्मान और संपत्ति है या नहीं।
- 10. दशम भाव: यानी कि जातक का कर्म। आप कौन से काम से अपनी जीविका चलाएंगे (नौकरी या व्यवसाय), यह इसी भाव से देखा जाता है। इसे 'कर्म भाव' या 'कैरियर भाव' कहते हैं।
- 11. एकादश भाव (11वां भाव): यह आपके धन संचय का भाव है। आपने जो कर्म से कमाया है, उसका आप सही संचय करेंगे या नहीं, यह भाव हमें मेहनत से कमाए हुए धन की बचत के बारे में बताता है।
- 12. द्वादश भाव (12वां भाव): यह आखिरी भाव दो चीजें दर्शाता है। सबसे पहले यह आपके खर्च को बताता है कि आप खर्चीले हैं या बचत करने वाले। साथ ही, यह बताता है कि आप अपनी संपत्ति का उपयोग कहां करेंगे—अपने देश में या विदेश में।










