रिपोर्ट - श्री संजय कुमार पाण्डेय,ज्योतिषाचार्य
पौष मास यानी की खरमास का महीना खरमास का महीना एक ऐसा महीना है जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं जैसे की शादी , यज्ञोपवीत ,मुंडन , गृह प्रवेश, नए काम व्यवसाय यह सब बंद रहते हैं, । कारण क्या है , या खरमास में बंद क्यों रहते मांगलिक कार्य आईए जानते हैं 14 दिसंबर से 14 जनवरी या 15 जनवरी तक मांगलिक कार्य इसलिए बंद होते है की हमारे आकाश मंडल में धनु राशि में सूर्य देवता का गोचर होता है धनु राशि बृहस्पति की राशि होती है जिसमें सूर्य देव का गोचर होने से देवगुरु बृहस्पति और सूर्य देव यानी पिता की एनर्जी कम मिलती है और सूर्य देव अपने गुरु की सेवा करते है इस कारण देवगुरु बृहस्पति संचार और आशीर्वाद मिलना कम हो जाता है , , उसे ही खरमास कहते हैं। संस्कृत शब्द खर का मतलब गदहा कहते और मास मतलब महीना होता है यानी खराब महीना। इसलिए इस माह में शुभ र्काय एवम मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं । खरमास साल में दो बार आता है । एक दिसंबर से जनवरी 14 या 15 जनवरी तक होता है । दूसरा मार्च से अप्रैल के मध्य में आता है। उसे समय भी मांगलिक कार्य, शुभ कार्य, नए कार्य वर्जित रहते हैं। मार्च से अप्रैल के मध्य में जो खरवास आता है उसे समय मीन राशि में सूर्य का गोचर होता है। सूर्य में सात ग्रहों का कलर होता है जिसमें धनु राशि और मीन राशि गुरु की राशि होती है गुरु के राशि में सूर्य का गोचर है या प्रवेश होने से धरती पर सातों ग्रहों के किरणों की शक्ति और ऊर्जा मिलना कम हो जाता है । जिसके कारण धरती पर सूर्य देवता का रोशनी धुंधली सी दिखती है कोहरा छाया रहता है यह देखा जा सकता है ।
खरमास महीना में क्या करना चाहिए......
धार्मिक अनुष्ठान जैसे कि यज्ञ , हवन रामायण सुंदरकांड का पाठ भागवत कथा का अनुष्ठान यह सब किए जा सकते हैं। यानी कि खरमास का महीना शुभ काम के लिए वर्जित है, धार्मिक अनुष्ठान के लिए कतई वर्जित नहीं है। सनातन धर्म और आकाश मंडल में सूर्य को पिता कहा गया है, सूर्य की सेवा अवश्य करनी चाहिए देवगुरु बृहस्पति का आराधना अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए जिससे कि ग्रहों का संचालन ग्रहों की ऊर्जा हमें बराबर मिलती रहे।










