झारखंड हाईकोर्ट ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय के गिरते शैक्षणिक स्तर को सुधारने और इसके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से दायर जनहित याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी रोशन कुमार बख्शी की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। दरअसल, बख्शी ने एक आईए (Interlocutory Application) याचिका दायर कर मूल जनहित याचिका की मेंटेनेबिलिटी को ही चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास माना।
कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए प्रशासनिक अधिकारी रोशन कुमार बख्शी पर 25,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। विशेष बात यह है कि यह राशि उन्हें अपने निजी कोष से चुकानी होगी और इसे 10 दिनों के भीतर बरियातू स्थित ब्रजकिशोर नेत्रहीन बालिका विद्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग जानबूझकर तकनीकी बहाने बनाकर अदालत के आदेशों को लागू होने से रोक रहे हैं और एडहॉक कमेटी की बैठक में बाधा डाल रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
विद्यालय के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए कोर्ट ने नई नियुक्तियों का भी ऐलान किया है। अस्थायी कार्यकारिणी समिति के निवर्तमान सभापति अशोक कुमार सिन्हा के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए, अदालत ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और इसी विद्यालय के पूर्व छात्र राजकुमार को नया सभापति नियुक्त किया है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नेतरहाट विद्यालय एडहॉक कमेटी की अगली बैठक आगामी 2 मई को सुबह 11:00 बजे आयोजित की जाए। यह पूरी कानूनी कार्यवाही केदारनाथ लाल दास द्वारा दायर उस याचिका पर आधारित है, जिसमें विद्यालय की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाने की गुहार लगाई गई है।









