चतरा। सदर थाना क्षेत्र के भोज्या गांव में तालाब में डूबने से एक मां और उनकी दो मासूम बेटियों की असामयिक और दर्दनाक मृत्यु के बाद अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। शोक संतप्त परिजनों से सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के नाम पर पांच हजार रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के एक स्वीपर ने इस त्रासदी के बीच परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए ढाई हजार रुपये नकद और ढाई हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से बतौर रिश्वत लिए। इस अमानवीय कृत्य की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी है।
नव पदस्थापित उपायुक्त (डीसी) रवि आनंद ने इस मामले को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि हो गई है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम के लिए परिजनों से पैसे ऐंठने की बात सही पाई गई है और अब दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की अवैध वसूली न केवल गैरकानूनी है बल्कि बेहद अनैतिक भी है।
मामले की गहराई से तफ्तीश और निष्पक्ष जांच के लिए डीसी ने एसडीओ सदर जहुर आलम के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय विशेष जांच कमेटी का गठन किया है। इस उच्च स्तरीय कमेटी में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को भी शामिल किया गया है। उपायुक्त ने कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उनके समक्ष प्रस्तुत करें ताकि दोषियों पर अविलंब कार्रवाई की जा सके।
डीसी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी स्वीपर को तत्काल नौकरी से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी पहचान की जा रही है, जिनके विरुद्ध पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह भ्रष्टाचार और अमानवीय कृत्यों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब और पीड़ित परिवार को ऐसी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।









