लोहरदगा – लोहरदगा में खाकी वर्दी का मानवीय चेहरा देखने को मिला। दरअसल अंधविश्वास के कारण मृतक का अंतिम संस्कार रूका हुआ था। जिसके बाद थाना प्रभारी ने उस विवाद को सुलझाया और शव को कंधा दिया।
लोहरदगा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के भीतर संवेदनाओं और मानवता से भरा एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है। सेन्हा थाना प्रभारी नीरज झा ने अपने एक अभूतपूर्व और मानवीय कदम से न केवल दो गांवों के बीच उपजे गंभीर विवाद को शांत कराया, बल्कि खुद अर्थी को कंधा देकर मृतक का अंतिम संस्कार भी कराया। उनकी इस पहल ने समाज को सामाजिक सौहार्द और इंसानियत का एक बड़ा संदेश दिया है।
घटना सेन्हा थाना क्षेत्र के अलौदी और पारही डांड़ी टोली गांव से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पारही डांड़ी टोली के एक ग्रामीण की असमय मृत्यु हो गई थी। पूरा परिवार शोक में डूबा था और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच, श्मशान घाट के उपयोग को लेकर दोनों गांवों के बीच अचानक विवाद खड़ा हो गया। अलौदी गांव के कुछ लोगों ने अंधविश्वास और कुछ दकियानूसी मान्यताओं का हवाला देते हुए दूसरे गांव के शव का अपने क्षेत्र के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने का कड़ा विरोध शुरू कर दिया था। जिसे थाना प्रभारी ने अपनी सूझबूझ से सुलझा दिया।








