(प्रमोद खंडेलवाल, संवाददाता, हजारीबाग)
हजारीबाग - न्याय की मांग को लेकर हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा की एक अनोखी पहल देखने को मिली। दरअसल मठ के महंत विजयानंद दास 181 वर्षों बाद भगवान की विग्रह मूर्ति को लेकर समाहरणालय पहुंचे और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। महंत विजयानंद दास का आरोप है कि मठ की जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय से न्याय नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 2022 से वे न्यायालय, समाहरणालय और अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक मामले का समाधान नहीं हो पाया है।
उन्होंने जमीन से जुड़े विवाद, कथित फर्जी जमाबंदी, एलपीसी निर्गत होने और जांच में हो रही देरी को लेकर अपनी नाराजगी जताई और सोमवार को भगवान की विग्रह मूर्ति के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समर्थकों के साथ समाहरणालय पहुंचे। महंत विजयानंद दास ने हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने संबंधित दस्तावेज और अपनी शिकायतें उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कीं। मुलाकात के दौरान उपायुक्त हेमंत सती ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बिंदुओं की जांच कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिकायत में उठाए गए सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।








