ओडिशा से आई यह खबर हर माता-पिता को झकझोर देने वाली है।
एक मामूली सा चिप्स का पैकेट एक 8 साल के मासूम बच्चे की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की लापरवाही और जागरूकता की कमी का खतरनाक उदाहरण है।
जानकारी के अनुसार, बच्चा ट्यूशन से लौटते समय पास की दुकान से चिप्स का पैकेट खरीदकर घर लाया था। घर पर मां रसोई में खाना बना रही थीं और गैस चूल्हा जल रहा था। इसी दौरान मां कुछ देर के लिए किचन से बाहर चली गईं।
उसी वक्त बच्चा चिप्स का पैकेट लेकर गैस चूल्हे के पास पहुंच गया।
अचानक पैकेट बच्चे के हाथ से छूट गया और गैस की आग के संपर्क में आते ही ज़ोरदार धमाके के साथ फट गया। विस्फोट इतना तेज़ था कि बच्चे की एक आंख की पुतली बाहर आ गई और आंख पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली एक आम चीज़ इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।

क्यों हुआ यह हादसा?
चिप्स, कुरकुरे और अन्य पैकेट वाले स्नैक्स में नाइट्रोजन गैस भरी होती है, जिससे पैकेट फूले रहते हैं और सामान सुरक्षित रहता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आग या तेज़ गर्मी के संपर्क में आने पर ये पैकेट फट सकते हैं और गंभीर हादसा हो सकता है।
बड़ा सवाल: बच्चों के लिए कितने सुरक्षित हैं जंक फूड?
यह घटना सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ा भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
जंक फूड पहले ही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं, और अब ऐसे पैकेट जान का खतरा भी बनते जा रहे हैं।
माता-पिता और प्रशासन के लिए चेतावनी
• बच्चों को गैस चूल्हे, आग और रसोई से दूर रखें
• पैकेट वाले स्नैक्स बच्चों के हाथ में देने से पहले सतर्क रहें
• कंपनियों को ऐसे पैकेटों पर स्पष्ट चेतावनी लिखनी चाहिए
• प्रशासन को इस खतरे को लेकर जन जागरूकता अभियान चलाना चाहिए
यह घटना हम सभी के लिए एक कड़वी लेकिन जरूरी सीख है।
कृपया इस खबर को शेयर करें या अपनी वॉल पर लिखें, ताकि कोई और मासूम बच्चा इस तरह की भयावह दुर्घटना का शिकार न बने।








