ग्रेटर नोएडा वेस्ट | अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर की भागदौड़ से दूर ग्रेटर नोएडा वेस्ट (Noida Extension) में 'सस्ता घर' खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी आंखें खोलने वाली है। जिसे आप अपना आशियाना समझ रहे हैं, वह भू-माफियाओं का बुना हुआ एक ऐसा जाल हो सकता है जिसमें आपकी जिंदगी भर की कमाई फंस सकती है।
हाल ही में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने खेड़ा चौगानपुर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बने 8 रिहायशी टावरों को सील कर दिया है। प्राधिकरण अब इन इमारतों को जमींदोज करने की तैयारी में है।
1. प्राधिकरण की 'सर्जिकल स्ट्राइक': कैसे ढहा माफियाओं का किला?
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुई एक दुखद घटना (युवराज नामक युवक की मौत) के बाद प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ (CEO) के सख्त निर्देशों पर भूलेख और परियोजना विभाग की एक संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल के साथ खेड़ा चौगानपुर के खसरा नंबर 109 पर धावा बोला।
मौके का खौफनाक मंजर:
- क्षेत्रफल: लगभग 10,000 वर्ग मीटर की बेशकीमती जमीन।
- अवैध निर्माण: मौके पर कोई एक-दो नहीं, बल्कि 8 बहुमंजिला टावर खड़े पाए गए।
- लापरवाही: इन टावरों का न तो कोई नक्शा पास था और न ही प्राधिकरण से कोई अनुमति (NOC) ली गई थी।
- कार्रवाई: टीम ने तुरंत 100 से ज्यादा फ्लैटों को सील कर उनकी चाबियां स्थानीय पुलिस को सौंप दी हैं।
2. शाहबेरी पार्ट-2 की आहट? क्यों फंस रहे हैं लोग?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थिति बिल्कुल शाहबेरी जैसी होती जा रही है। माफिया भोले-भाले खरीदारों को फंसाने के लिए 'इमोशनल और फाइनेंशियल' कार्ड खेलते हैं:
- सस्ते रेट का लालच: मार्केट रेट से 40% तक कम कीमत पर फ्लैट का ऑफर।
- आसान किस्तें: बिना बैंक लोन के, सीधे बिल्डर को किस्तों में भुगतान।
- भ्रामक वादे: माफिया दावा करते हैं कि यह जमीन 'आबादी' की है और जल्द ही अथॉरिटी से पास हो जाएगी।
अधिकारियों की चेतावनी: ओएसडी (OSD) राम नयन सिंह ने स्पष्ट किया है कि अधिसूचित क्षेत्र (Notified Area) में बिना अनुमति के एक ईंट रखना भी अपराध है। जो लोग इनमें पैसा लगा रहे हैं, वे सीधे तौर पर जोखिम मोल ले रहे हैं।
3. सीलिंग के बाद अब 'बुलडोजर' की बारी
प्राधिकरण के एसीईओ (ACEO) सुमित यादव ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई सिर्फ सीलिंग तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा:
- इन अवैध टावरों को ध्वस्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- सीलिंग तोड़ने या सरकारी काम में बाधा डालने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
- उन अधिकारियों की भी जांच की जा रही है जिनकी शह पर यह निर्माण कार्य इतने समय तक चलता रहा।
4. फ्लैट खरीदने से पहले इन 5 'गोल्डन रूल्स' को न भूलें
अगर आप ठगी से बचना चाहते हैं, तो प्राधिकरण द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करें:
क्र.सं. | सावधानी का तरीका | क्या जांचें? |
1 | खसरा नंबर की जांच | अथॉरिटी के भूलेख विभाग जाकर चेक करें कि जमीन अधिग्रहित (Acquired) है या नहीं। |
2 | नक्शा और अलॉटमेंट | बिल्डर से अथॉरिटी द्वारा जारी 'Sanctioned Plan' और अलॉटमेंट लेटर मांगें। |
3 | RERA रजिस्ट्रेशन | बिना UP-RERA नंबर के किसी भी प्रोजेक्ट में एक रुपया भी न लगाएं। वेबसाइट पर इसकी पुष्टि करें। |
4 | बैंक लोन की स्थिति | यदि कोई भी सरकारी या प्रतिष्ठित प्राइवेट बैंक उस प्रोजेक्ट पर लोन नहीं दे रहा, तो समझ लें कि दाल में कुछ काला है। |
5 | ग्रीन बेल्ट और लैंड यूज | सुनिश्चित करें कि इमारत ग्रीन बेल्ट या सरकारी सुविधा के लिए आरक्षित जमीन पर तो नहीं बनी है। |
सतर्कता ही बचाव है
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में माफियाओं का जाल गहरा है। आपकी एक छोटी सी चूक आपको सड़क पर ला सकती है। प्राधिकरण की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने साबित कर दिया है कि अवैध निर्माण पर आज नहीं तो कल, ताला जरूर लटकेगा। इसलिए 'सस्ते' के फेर में अपनी 'जमा-पूंजी' दांव पर न लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ):
- क्या खेड़ा चौगानपुर में पैसा डूब गया? जिन लोगों ने वहां बुकिंग की है, उनके लिए कानूनी राह मुश्किल है क्योंकि निर्माण पूरी तरह अवैध है।
- अवैध कॉलोनी की पहचान कैसे करें? यदि सड़क चौड़ी नहीं है, सीवर सिस्टम नहीं है और बिल्डर अथॉरिटी का पास नक्शा नहीं दिखा रहा, तो वह अवैध है।









