अयोध्या: राम नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ आस्था के नए अध्याय जुड़ते जा रहे हैं। रामलला की मनमोहक मूर्ति के बाद अब मंदिर परिसर में 'अवध के राजा राम' की एक और दिव्य प्रतिमा स्थापित होने जा रही है। कर्नाटक की कला और श्रद्धा का संगम यह प्रतिमा न केवल अपनी भव्यता, बल्कि अपनी अनूठी कलाकारी के लिए भी चर्चा में है।
एक नज़र में: प्रतिमा की मुख्य विशेषताएं
विशेषता | विवरण |
कलाकार | डॉ. जयश्री फणीश (बेंगलुरु, कर्नाटक) |
शैली | तंजावुर पेंटिंग शैली (Thanjavur Style) |
सामग्री | शीशम की लकड़ी, 24 कैरेट स्वर्ण पत्र, माणिक, पन्ना, मोती, मूंगा और हीरा |
वजन | लगभग 800 किलोग्राम (5 कुंटल से अधिक) |
आकार | 10 फीट ऊंची, 6 फीट चौड़ी और 2.5 फीट गहरी |
अनुमानित लागत | ₹2.5 करोड़ |
9 महीने की साधना से तैयार हुई 'रत्नजड़ित' प्रतिमा
बेंगलुरु की प्रसिद्ध कलाकार डॉ. जयश्री फणीश ने इस अद्भुत कृति को तैयार करने के लिए लगभग 9 महीने तक कठिन परिश्रम और साधना की है। इस प्रतिमा को तंजावुर शैली में बनाया गया है, जिसमें असली सोने की परतों और कीमती रत्नों का उपयोग किया गया है। 10 फीट ऊंचे शीशम के फ्रेम में जड़ी भगवान राम की यह छवि भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली है।
कहां स्थापित होगी यह भव्य प्रतिमा?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, इस भव्य पेंटिंग/प्रतिमा को यात्री सुविधा केंद्र (PFC) परिसर में संत तुलसीदास मंदिर के समीप अंगद टीला की दिशा में स्थापित किया गया है। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि यह प्रतिमा राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और अटूट भक्ति का केंद्र बनेगी।
भारतीय डाक के जरिए पहुंची अयोध्या
इस भारी-भरकम (800 किलो) प्रतिमा को कर्नाटक से अयोध्या लाने का कार्य भारतीय डाक विभाग (India Post) की लॉजिस्टिक सेवा के माध्यम से किया गया। कलाकार ने इसे राम मंदिर ट्रस्ट को दान स्वरूप भेंट किया है।
रोचक तथ्य: इससे पहले गर्भगृह में स्थापित मुख्य 'रामलला' की मूर्ति भी कर्नाटक के ही मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई थी। अब कर्नाटक की ही डॉ. जयश्री फणीश की यह कृति मंदिर की शोभा बढ़ाएगी।
भक्तों में भारी उत्साह
जैसे ही यह खबर फैली कि 2.5 करोड़ की रत्नजड़ित प्रतिमा अयोध्या पहुंच चुकी है, इसे देखने के लिए राम भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तंजावुर कला की यह भव्यता और उसमें जड़े असली हीरा-पन्ना भगवान राम के 'राजसी स्वरूप' को जीवंत करते हैं।
निष्कर्ष: अयोध्या अब न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय शिल्प कला का वैश्विक संग्रहालय भी बनता जा रहा है। कर्नाटक की यह भेंट राम मंदिर की भव्यता में चार चांद लगा रही है।
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